कद-काठी ही नहीं, नशे की लत के भी हो सकते हैं जेनेटिक कारण, जानिए क्या कहता है अध्ययन

क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर क्यों कुछ लोग सिगरेट बड़ी आसानी से छोड़ देते हैं, तो कुछ को इसकी बुरी लत लग जाती है। कुछ लोग शराब का सेवन बंद करना चाहते हुये भी इसे नहीं कर पाते हैं। जानिए इससे जुड़े अध्ययन में क्या सामने आया।
शराब और सिगरेट की लत के हो सकते हैं जेनेटिक कारण। चित्र : शटरस्टॉक
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यूएनसी स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ता यह पता लगाने और समझने की कोशिश कर रहे हैं कि लोगों को शराब की और अन्य नशीले पदार्थों की लत क्यों लग जाती है। आखिर लोग इसकी लत के शिकार क्यों हो जाते हैं? यूएनसी स्कूल ऑफ मेडिसिन के पीएचडी के निर्देशन और शोधकर्ता हाईजंग वोन अंतर्निहित जेनेटिक विविधताओं को समझ रहे हैं। ताकि वैज्ञानिक उन लाखों लोगों की सहायता के लिए उपचार विकसित कर सकें, जो नशे की लत से जूझ रहे हैं।

मॉलिक्यूलर जर्नल में प्रकाशित हुए एक अध्ययन में सामने आया कि नशीले पदार्थों की लत लगना और इससे छुटकारा पाना दोनों ही जेनेटिक्स पर निर्भर करता है। आप शराब पीने के कितने आदी हैं और कितने नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपके जींस किस तरह के हैं। तो यदि आपको नशीले पदार्थों की लत छोड़ने में समस्या आ रही है, तो यह आपके जींस के कारण हो सकता है।

जानिए इससे जुड़े अध्ययन में क्या सामने आया?

वोन, जेनेटिक्स के सहायक प्रोफेसर और यूएनसी न्यूरोसाइंस सेंटर में एक शोधकर्ता और उनकी टीम ने शराब पीने और सिगरेट पीने से जुड़े जीन की खोज की। जिसमें वैज्ञानिकों ने पाया कि कुछ प्रकार के न्यूरॉन्स-मस्तिष्क कोशिकाओं में ऐसे जींस ज़्यादा मात्रा में हैं – जो अन्य कोशिकाओं को मस्तिष्क में रासायनिक संदेश भेजने का कारण बनते हैं।

वोन के अनुसार, “अध्ययन से पता चला है कि, पारिवारिक गतिशीलता या व्यक्तिगत आघात जैसे कारकों के अलावा, लत में जेनेटिक भी एक भूमिका निभा सकते हैं।”

मनोचिकित्सा, ने यह भी पाया कि धूम्रपान से जुड़े जीन दर्द की अनुभूति से जुड़े थे। ऐसे में मॉर्फिन जैसी अन्य दवाओं का सेवन भी शराब के उपयोग से जुड़े अन्य जीनों से जुड़ा था। शोधकर्ताओं ने सब्सटेन्स अब्यूस के लिए संभावित नोबल ट्रीटमेंट खोजने के लिए सार्वजनिक रूप से सुलभ औषधीय डेटाबेस का आकलन भी किया।

धूम्रपान की लत न लगने दें। चित्र : शटरस्टॉक

तब ऐसी स्थिति में क्या करना चाहिए

वोन लैब में स्नातक छात्र और पेपर के पहले लेखक नैन्सी सी के अनुसार, ” एंटीसाइकोटिक्स और अन्य मूड स्टेबलाइजर्स उन लोगों के लिए चिकित्सीय उपचार देने में सक्षम हो सकते हैं, जो मादक द्रव्यों के सेवन से जूझ रहे हैं”। जिसमें कई प्रचलित बीमारियां और समस्याएं, जिनमें फेफड़े का कैंसर, लिवर और सब्सटेन्स अब्यूस डिसऑर्डर शामिल हैं।

वे कहते हैं, “हमारी जांच से पता चला है कि अन्य पदार्थ, जैसे कोकीन, सिगरेट स्मोकिंग और शराब के उपयोग से संबंधित समस्याओं से जुड़े जीन भी व्यक्ति की अभिव्यक्ति को प्रभावित कर सकते हैं।”

वोन की टीम ने विभिन्न प्रकार के उत्तेजक न्यूरॉन्स के अलावा अन्य सेल प्रकारों की भी खोज की। जैसे कॉर्टिकल ग्लूटामेटेरिक, मिडब्रेन डोपामिनर्जिक, गैबैर्जिक, और सेरोटोनर्जिक न्यूरॉन्स जो जोखिम जीन से जुड़े हैं। इन पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। ताकि उन लोगों की मदद की जा सके, जो किसी भी तरह के नशे की लत को छोड़ना चाहते हैं।

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लेखक के बारे में
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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