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माइंडफुल योगा दे सकता हैं पीसीओएस की तकलीफ में 29% तक राहत : शोध

Published on:21 June 2020, 16:00pm IST
पीसीओएस महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन से जुड़ी एक आम समस्या है, जिससे उनका जीवन काफी ज्यादा प्रभावित होता है। पर माइंडफुल योग से आप इस तकलीफ में कुछ राहत पा सकती हैं।
टीम हेल्‍थ शॉट्स
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शोध में भी यह साबित हुआ है कि योग पीसीओएस जैसी तकलीफ में राहत दिलाता है। चित्र: शटरस्टॉक

पीसीओएस के सबसे आम लक्षणों में से एक है बालों का जरूरत से ज्यादा बढ़ना। टेस्टोस्टेरोन के स्तर में आया बदलाव भी इसका एक आम लक्षण है। जिससे महिलाएं बहुत ज्यादा परेशान हो जाती हैं। पर हाल ही में अमेरिका में हुए एक अध्ययन में यह साबित हुआ है कि माइंडफुल योग से आप इस समस्या में राहत पा सकती हैं।

शोधकर्ताओं के अनुसार, एक घंटे की माइंडफुल योग क्लास अगर सप्ताह में तीन बार की जाए तो इससे पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) में राहत मिलती है। इससे तीन महीने की अवधि में महिलाओं के टेस्टोस्टेरोन के स्तर में 29% तक की गिरावट देखी गई।

पीसीओएस एक सामान्य हार्मोनल विकार है जो प्रजनन, चयापचय और मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह भी अनुमान लगाया गया है कि पीसीओएस प्रजनन उम्र में 5 से 15 फीसदी महिलाओं को प्रभावित करता है। यह एनोवुलेटरी इंफर्टिलिटी का सबसे आम कारण है।
पीसीओ से ग्रस्त महिलाओं को अनियमित पीरियड, मुंहासे, पुरुषों की तरह का गंजापन, उदासीनता और गर्भपात का सामना करना पड़ता है।

अमेरिकन ओस्टियोपैथिक एसोसिएशन के जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, इससे म‍हिलाओं में अन्य एंड्रोजन जैसे डीएचईए के स्तर में भी गिरावट आई। जबकि अवसाद और चिंता के स्तर में क्रमशः 55 और 21% की बढ़ोतरी हुई।

माइंडफुल योग और पीसीओएस के बीच क्या संबंध है?

अमेरिका में ओस्टियोपैथिक मेडिसिन के लेकएरी कॉलेज से अध्ययन के प्रमुख लेखक डायना स्पिलमैन कहते हैं, “माइंडफुल योगा एक तरह से पीसीओएस के इलाज के लिए एक आशाजनक विकल्प प्रतीत होता है, जो इस समस्या में कई तरह से राहत दे सकता है।”

शोधकर्ताओं का मानना है कि टेस्टोस्टेरोन और डीएचईए सहित एण्ड्रोजन के स्तर को संतुलित करना इसके लक्षणों में राहत देता है। साथ ही वजन घटाने से भी इसमें राहत मिलती है।

निष्कर्षों के लिए, उन्होंने 22-43 वर्ष की आयु की ऐसी महिलाओं को शामिल किया जो पीसीओएस से ग्रस्त थीं। इन्हें तीन महीने तक ध्यान योग सेशन में हिस्सा लेने को कहा गया।
हालांकि इससे पहले इन्हें एक सप्ताह की माइंडफुल योगा प्रैक्टिस का अभ्यास करने का प्रशिक्षण दिया गया था।

पीसीओएस से ग्रस्त महिलाओं पर माइंड योगा का प्रभाव

माइंडफुल योगा सेशन एक घंटे का था और हफ्ते में तीन बार, तीन महीने तक लगातार किया गया। इससे एण्ड्रोजन का स्तर बेहतर हुआ। साथ ही अवसाद और चिंता में भी कमी आई और वजन घटाने में मदद मिली।

इसमें शामिल कुछ महिलाओं ने मुंहासों में कमी आने की बात कही और पीरियड भी रेगुलर हुए। यह माइंडफुल योग के बाद देखने में आया।

“योग के बहुत सारे लाभ हैं। इसके सबसे अच्छे गुणों में से एक यह है कि यह उम्र के प्रभाव और फिटनेस मैनेज करने के लिए एक बेहतर विकल्प है। शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) वाली महिलाओं को इससे होने वाली समस्याओं से राहत पाने, एण्ड्रोजन के स्तर को संतुलित करने और वजन पर नियंत्रण रखने के लिए माइंडफुल योग करना चाहिए।

इसलिए, यदि आप PCOS से पीड़ित नहीं हैं, तो भी आपको माइंडफुल योग का सेशन जरूर लेना चाहिए। हालांकि पीसीओ से पीड़ित महिलाओं के लिए तो यह और भी ज्यादा फायदेमंद है।

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