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क्‍या गोबर और गोमूत्र कर सकते हैं किसी भी संक्रमण का इलाज? जानिये क्या है सच्चाई

Published on:18 May 2021, 14:00pm IST
आस्‍थाओं को निभाने के और बहुत से मौके आएंगे। फि‍लहाल जरूरत है वैज्ञानिक तरीके से इस महामारी से मुकाबला करने की।
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ
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जानिए क्या होना चाहिए सामान्य पेशाब का रंग. चित्र : शटरस्टॉक
जानिए क्या होना चाहिए सामान्य पेशाब का रंग. चित्र : शटरस्टॉक

कोरोनावायरस से जूझते हुए हम न केवल शारीरिक रूप से परेशान हुए हैं, बल्कि इसने हमारे मन पर बहुत आघात किया है। इसके उपचार के लिए हम हर तरह का उपाय कर लेना चाहते हैं। फि‍र चाहें वे एलोपैथी दवाएं हों, आयुर्वेद की जड़ी-बूटियां या फि‍र हमारी आस्‍थाओं में छुपे बैठे टोटके। ऐसा ही ही एक उपाय है गोमूत्र और गाय का गोबर। जिसे कुछ लोग कोरोनावायरस से बचाव का उपाय बता रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि हम इस बारे में हर तथ्‍य स्‍पष्‍ट तौर पर आपके सामने रखें।

भारतीय जनमानस में गाय का बहुत बड़ा स्थान है। सदियों से हमारा ग्रामीण वर्ग गोबर और गौमूत्र का इस्तेमाल विभिन्न बीमारियों से लड़ने में करते आ रहा हैं और इस पर उनका बहुत विश्वास है। वर्तमान समय में कुछ आयुर्वेदाचार्यों ने गौमूत्र और गोबर को एक बार फिर प्रचलित किया है।

पंचगव्‍य है ये

आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथ गोमूत्र को जीवन का अमृत मानते हैं। गोमूत्र और गोबर पंचगव्य की पांच सामग्रियों में से एक हैं, जो गाय (मूत्र, दूध, घी, दही और गोबर) से प्राप्त होती है। गाय आधारित उपचार को पंचगव्य चिकित्सा कहा जाता है।

वर्तमान समय में कोरोना महामारी की वजह से यह फिर से प्रचलन में आ गया है, परंतु यदि हम विज्ञान की दृष्टि से देखें तो चिकित्सक इसे मूर्खतापूर्ण बताते हैं। कोरोना महामारी में भी लोग गोमूत्र पीने की सलाह देते हैं। हालांकि गौमूत्र के कई फायदे हैं मगर कोविड – 19 जैसी बीमारी से लड़ने के लिए यह निहायती अवैज्ञानिक और दकियानूसी उपाय है।

कोविड-19 के इलाज में भूल भी न इस्तेमाल करें गौमूत्र या गोबर । चित्र: शटरस्‍टॉक
कोविड-19 के इलाज में भूल भी न इस्तेमाल करें गौमूत्र या गोबर । चित्र: शटरस्‍टॉक

तो आइये सबसे पहले बात करते हैं गौमूत्र के बारे में

नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी के अनुसार गोमूत्र में – 95 प्रतिशत पानी होता है जिसमें 2.5 प्रतिशत यूरिया, खनिज, 24 प्रकार के लवण, हार्मोन और 2.5 प्रतिशत एंजाइम होते हैं। अन्य अवयवों में आयरन, कैल्शियम, फास्फोरस, कार्बोनिक एसिड, पोटाश, नाइट्रोजन, अमोनिया, मैंगनीज, सल्फर, फॉस्फेट, पोटेशियम, यूरिया, यूरिक एसिड, अमीनो एसिड एंजाइम, साइटोकाइन और लैक्टोज शामिल हैं।

गौमूत्र क्यों और कैसे फायदेमंद हो सकता है

जर्नल ऑफ ड्रग डिलीवरी एंड थेराप्यूटिक्स के अनुसार गोमूत्र एक दिव्य औषधि है और इसका उपयोग मधुमेह, रक्तचाप, अस्थमा, सोरायसिस, एक्जिमा, दिल का दौरा, धमनियों में रुकावट, दौरे, कैंसर, एड्स, बवासीर, प्रोस्टेट, गठिया, माइग्रेन, थायरॉयड, अल्सर, एसिडिटी के इलाज के लिए किया जाता है।

गोमूत्र में वे सभी पदार्थ होते हैं, जो मानव शरीर में प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। इस प्रकार, गोमूत्र के सेवन से इन पदार्थों का संतुलन बना रहता है और इससे कैंसर, एड्स, ऑटोइम्यून विकारों जैसे असाध्य रोगों को ठीक करने में मदद मिलती है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध संक्रामक रोगों के मामले में बेहतर लाभ मिलता है।

कोरोना संक्रमण से लड़ने में नहीं परंतू गौमूत्र अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से लड़ने में फायदेमंद साबित हो सकता है जैसे –

गोमूत्र को कुष्ठ, पेट के दर्द, सूजन और यहां तक कि कैंसर के इलाज में भी मददगार माना जाता है।

इसे पेप्टिक अल्सर, अस्थमा और कुछ यकृत रोगों के उपचार में भी सहायक माना जाता है।

अस्थमा के उपचार में गौमूत्र फायदेमंद साबित हो सकता है. चित्र : शटरस्टॉक
अस्थमा के उपचार में गौमूत्र फायदेमंद साबित हो सकता है. चित्र : शटरस्टॉक

गोमूत्र भी सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालकर शरीर को अंदर से शुद्ध करता है, जिससे मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप आदि सहित बड़ी संख्या में स्वास्थ्य जोखिम कम होते हैं।

अब जानिये गाय के गोबर के बारे में

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ करंट फार्मास्यूटिकल रिसर्च के अनुसार गाय के गोबर में रोगाणुरोधी गुण मौजूद होते हैं। गाय का गोबर मिट्टी की खनिज स्थिति को बढ़ाता है, कीटों और रोगों के खिलाफ पौधे के प्रतिरोध को बढ़ाता है। गाय के गोबर के माइक्रोफ्लोरा में प्रचुर मात्रा में बेसिली, लैक्टोबैसिलस और कोक्सी और कुछ पहचाने गए और अज्ञात कवक और खमीर होते हैं, जो खेती के लिए अच्छे माने जाते हैं।

इसलिए, गौमूत्र और गोबर के अपने फायदे हैं। मगर कोरोनावायरस जैसी महामारी से लड़ने के लिए इसका इस्तेमाल एक बुरा विचार है।

ध्‍यान रहे

यह वायरस जनित बीमारी है और बहुत तेजी से फैलती है। इसलिए कोरोनावायरस के इलाज में किसी भी तरह के अंधविश्‍वास पर भरोसा करने की बजाए सही और योग्‍य डॉक्‍टर की सलाह पर भरोसा करें।

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ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।