MERS Cov : क्या मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोनावायरस का नया वैरिएंट है? जानिए इस बारे में क्या कह रहा है WHO

सऊदी अरब में कोरोना के नये वैरिएंट के कारण दो लोगों की मौत हो गयी। इस बात की पुष्टि वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने की है। मरने वाले दोनों व्यक्तियों में यह संक्रमण रॉ केमल मिल्क के बाद आया। क्या हैं इसके स्वास्थ्य जोखिम और क्यों जरूरी है इससे सावधान रहना, आइए जानते हैं।

MERS Cov corona virus ka variant hai
मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस कोरोना का नया वैरिएंट है। चित्र : अडोबी स्टॉक
स्मिता सिंह Published: 13 Sep 2023, 17:03 pm IST
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कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) और कोरोना वैक्सीन बूस्टर डोज (Corona Booster Dose) लगाने के बावजूद कोरोना वायरस (coronavirus) का भय समाप्त नहीं हुआ है। हर थोड़े अंतराल पर कोरोना के नये वैरिएंट (new variant of corona) के आने की सूचना विश्व के किसी न किसी कोने से मिलती ही रहती है। साउदी अरब में कोरोनोवायरस के घातक वैरिएंट के संपर्क में आने से इस साल की शुरुआत में दो लोगों की मृत्यु हो गई। वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन ने भी इस बात की पुष्टि कर दी है। जानते हैं इस नये वैरिएंट के बारे में वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO about MERS) क्या कहता है?

मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (MERS)

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कोरोना वायरस के कारण अब तक वैश्विक स्तर पर 1 करोड़ 49 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। डब्ल्यूएचओ के स्वास्थ्य अधिकारियों ने यह चेतावनी दी है कि मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (MERS) कोरोना का नया वैरिएंट है। यह अत्यधिक घातक प्रकार का कोरोना वायरस है, जिससे संक्रमित होने के बाद 3 में से दो लोगों की मौत हो गई। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार, 42 और 85 वर्ष की उम्र के दो पुरुषों की क्रमशः नवंबर 2022 और जनवरी 2023 में सऊदी अरब में मृत्यु हो गयी। इन दोनों के अलावा, 3 और लोगों में बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ लक्षण देखे गए, लेकिन इन लोगों को बचा लिया गया।

ज़ूनोटिक वायरस (Zoonotic Virus)

यह वायरस ज़ूनोटिक है। इसका मतलब है कि संक्रमण जानवरों से फैला है। इससे संक्रमित लगभग 35 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है। यह घातक वायरस आमतौर पर ड्रोमेडरी ऊंट (Camel) जैसे संक्रमित जानवरों से फैलता है। संक्रमित हुए लोगों ने 14 दिन पहले ऊंटनी के कच्चे दूध का सेवन किया था।

मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस की पहचान पहली बार 2012 में जॉर्डन में हुई थी। तब से इससे 2605 संक्रमण और 936 मौतें हुई हैं। अधिकांश मामले अरब प्रायद्वीप में दर्ज किए गए हैं, कुछ ब्रिटेन सहित अन्य जगहों पर पाए गए हैं। ज़ूनोटिक रोग कोरोनोवायरस परिवार का हिस्सा है, जो सामान्य सर्दी से लेकर गंभीर तीव्र श्वसन सिंड्रोम (एसएआरएस) तक स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकता है। मर्स कोविड 19 की तुलना में कम संक्रामक है।

कैसे फ़ैल सकता है मर्स कोव (MERS Cov causes)

ऊंटों या संक्रमित ऊंटों को छूने से यह फ़ैल सकता है। उनके शरीर के तरल पदार्थ (दूध, मल, मूत्र, पेशाब, लार, थूक आदि से संक्रमण फ़ैल सकता है । इसके आसपास रहने से किसी व्यक्ति के मर्स- से संक्रमित होने की संभावना बढ़ सकती है।

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ऊंट के दूध या संक्रमित ऊंटों को छूने से यह फ़ैल सकता है। चित्र : अडोबी स्टॉक

क्या हो सकते हैं लक्षण (MERS Cov Symptoms)

इसके ज्यादातर लक्षण कोरोना वायरस के लक्षण से मिलते हैं। एमईआरएस के सामान्य लक्षणों में बुखार, खांसी और सांस लेने में तकलीफ शामिल हैं। कुछ लोगों को दस्त, मतली और उल्टी भी हो सकती है। जब कोई व्यक्ति मर्स-कोव के संपर्क में आता है, तो इसके लक्षण प्रकट होने लगते हैं। 2 से 14 दिन यह रह सकता है। जीनोम मेटा विश्लेषण से पता चला है कि सार्स-कोव 2 बीटाकोरोनावायरस जीनस से संबंधित है, जिसमें बैट सार्स जैसे कोरोनावायरस, सार्स-कोव और मेर्स-कोव शामिल हैं। सार्स-कोव 2 में एक जीनोमिक संरचना होती है, जो अन्य बीटाकोरोनावायरस से अलग होती है

क्या हो सकता है उपचार (MERS Cov Treatment)

वर्तमान में, कई वैक्सीन ऊंटों में मर्स-कोव संक्रमण के खिलाफ प्रभाव दिखा रहे हैं। कुछ का  क्लिनिकल टेस्ट किया गया है। लेकिन किसी भी वैक्सीन को पूरी तरह कारगर नहीं माना जा रहा है।

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बचाव के उपाय (MERS Cov Prevention)

डब्ल्यूएचओ मध्य पूर्व जाने वाले सभी यात्रियों को नियमित रूप से अपने हाथ साबुन और पानी से धोने की सलाह देता है। खासकर खेतों, खलिहानों या बाजार क्षेत्रों में जाने के बाद और अच्छी तरह हाथों को सैनिटेट करना चाहिए।

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कई वैक्सीन ऊंटों में मर्स-कोव संक्रमण के खिलाफ प्रभाव दिखा रहे हैं। चित्र : एडोबी स्टॉक

यात्रियों को ऊंटनी का कच्चा दूध, ऊंटनी का मूत्र पीने या बिना अच्छी तरह पकाया गया मांस खाने से भी बचना चाहिए।

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स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।...और पढ़ें

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