ऑटोइम्यून डिजीज का जोखिम बढ़ा रहे हैं ग्लूटेन सेंसिटिविटी और लीकी गट सिंड्रोम, जानिए इसका कारण और समाधान

ग्लूटेन सेंसटिविटी को पाचन संबंधी प्रभावों के अलावा, ऑटोइम्यून बीमारियों के जटिलता को बढ़ाने से जोड़ा जा रहा है। वहीं ये स्थिति लीकी गट सिंड्रोम (Leaky gut syndrome) के खतरे को भी बढ़ा रही है।
gut health ko bnaye rakhna jaruri hai
आंत माइक्रोबायोम को बेहतर बनाए रखने के लिए खान पान का ख्याल रखना बेहद ज़रूरी है। चित्र : अडोबी स्टॉक
अंजलि कुमारी Published: 31 Dec 2023, 05:00 pm IST
  • 134

ऑटोइम्यून बीमारियों के लगातार बढ़ते मामलों में ग्लूटेन सेंसटिविटी के अक्सर कम आंकने वाले प्रभाव की ओर संवेदनशीलता को बढ़ा दी है। इस कंडीशन को, नॉन-सीलिएक ग्लूटेन सेंसटिविटी (NCGS) के रूप में जाना जाता है, जो आज के समय में ऑटोइम्यून डिजीज की जटिलताओं को समझने में एक फोकस पॉइंट बन चुका है। ग्लूटेन सेंसटिविटी को पाचन संबंधी प्रभावों के अलावा, ऑटोइम्यून बीमारियों के जटिलता को बढ़ाने से जोड़ा जा रहा है। वहीं ये स्थिति लीकी गट सिंड्रोम (Leaky gut syndrome) के खतरे को भी बढ़ा रही है।

आज हेल्थ शॉट्स के साथ जानेंगे ऑटोइम्यून डिजीज पर ग्लूटेन सेंसिटिविटी के प्रभाव, क्योंकि अब के समय में इस स्थिति को समझना बेहद महत्वपूर्ण हो चुका है। इस विषय पर अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए हमने, strmRx बायो साइंस सॉल्यूशन इंडिया के फाउंडर और रीजेनरेटिव मेडिसिन रिसर्चर, डॉ प्रदीप महाजन से सलाह ली। डॉक्टर ने इस विषय पर कुछ जरूरी जानकारी दी है, तो चलिए जानते हैं इस बारे में अधिक विस्तार से।

leaky gut
क्या आपको लीकी गट की समस्या है? चित्र : शटरस्टॉक

क्या है लीकी गट सिंड्रोम और ऑटोइम्यून डिजीज का संबंध (Connection between autoimmune disease and leaky gut)

लीकी गट सिंड्रोम, या इंक्रीज इंटेस्टाइनल परमिएबिलिटी, एक ऐसी स्थिति है जहां आंत की परत क्षतिग्रस्त हो जाती है, जिससे पदार्थ ब्लड स्ट्रीम में लीक हो जाते हैं। हालांकि, इन्हें सामान्य रूप से ब्लॉक किया जा सकता है। इसमें ग्लूटेन जैसे अनडाइजेस्टिव प्रोटीन शामिल हैं, जो संवेदनशील व्यक्ति में इम्यून रिस्पांस को ट्रिगर कर सकते हैं। जबकि ग्लूटेन सेंसटिविटी में शरीर पर अटैक करने वाले इम्यून सिस्टम शामिल नहीं होते हैं। ग्लूटेन, लीकी गट सिंड्रोम और ऑटोइम्यून बीमारियों के बीच कई इंटरेस्टिंग चीजें छपी हैं, जिसकी जानकारी होना महत्वपूर्ण है।

यह भी पढ़ें : Too much spicy : डिश बन गई है बहुत स्पाइसी, तो इन 5 तरीकों से करें उसे ठीक

ऑटोइम्यून डिजीज से ग्रसित लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है ग्लूटेन सेंसटिविटी

पहले से ही रुमेटीइड गठिया, ल्यूपस या हाशिमोटो थायरॉयडिटिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों से जूझ रहे व्यक्तियों के लिए, ग्लूटेन सेंसटिविटी एक महत्वपूर्ण जटिल कारक बन जाती है। रिसर्च ने ऑटोइम्यून स्थितियों में निहित सूजन प्रतिक्रिया को बढ़ाने में ग्लूटेन संवेदनशीलता की संभावित भूमिका पर प्रकाश डाला है। गट लाइनिंग डैमेज, लीकी गट सिंड्रोम की विशेषता, के कारण ग्लूटेन ब्लड स्ट्रीम में में लीक हो सकता है, जिससे इम्यून रिस्पांस ट्रिगर हो जाते हैं, जो मौजूदा लक्षण को अधिक बढ़ा देते हैं। संभवतः ऑटोइम्यून बीमारियों की प्रगति में योगदान करते हैं।

ye autoimmune disease ke symptoms hain
ये सभी ऑटोइम्यून डिजीज के संकेत हैं। चित्र: शटरस्टॉक

अब जानें क्या है उपाय

रीजेनरेटिव मेडिसिंस ऑटोइम्यून डिजीज के क्षेत्र में एक आशाजनक रोल प्ले करते हैं। जो न केवल एक संभावित उपचार के रूप में बल्कि एक इम्यून मुड्यूलेटर के रूप में भी कार्य करती है। पारंपरिक दृष्टिकोणों के विपरीत, जो पूरी तरह से लक्षण प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करते हैं, रीजेनरेटिव मेडिसिंस का उद्देश्य ऑटोइम्यून कंडीशंस के मूल कारणों को संबोधित करना है, जिसमें ग्लूटेन सेंसटिविटी और लीकी गट सिंड्रोम से जुड़ी जटिल परस्पर क्रिया शामिल है।

रीजेनरेटिव मेडिसिंस के प्रमुख पहलुओं में से एक इसकी प्रतिरक्षा प्रणाली को नियंत्रित करने की क्षमता है। अत्याधुनिक उपचारों का लाभ उठाकर, यह पुनर्योजी चिकित्सा प्रतिरक्षा प्रणाली में संतुलन बहाल करने का प्रयास करती है। इस प्रकार यह संभावित रूप से ऑटोइम्यून बीमारियों में देखी जाने वाली अतिसक्रिय प्रतिक्रियाओं को कम कर देती है। यह इम्यून एक्टिविटीज को ट्रिगर करने में ग्लूटेन सेंसटिविटी की भूमिका की बढ़ती समझ के साथ संरेखित होता है, जो ऑटोइम्यून स्थितियों की प्रगति में योगदान देता है।

gluten intolrance wale logo ko gluten thaka saktaa hai
ग्लूटेन एक प्रोटीन है जो गेहूं, जौ और राई में पाया जाता है। चित्र- अडोबा स्टॉक

चलते-चलते

ग्लूटेन सेंसटिविटी, लीकी गट सिंड्रोम और ऑटोइम्यून बीमारियों के बीच के संबंध धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं। ग्लूटेन सेंसटिविटी से होने वाले नुकसान और लीकी गट सिंड्रोम से इसके संबंध को पहचानना बेहद महत्वपूर्ण है। डॉक्टर से लेकर ऑटोइम्यून बीमारी की चुनौतियों से निपटने वाले व्यक्ति दोनों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण है।

जैसे-जैसे रिसर्च आगे बढ़ रहा है, रीजेनरेटिव मेडिसिंस आशा की किरण के रूप में सामने आ रही हैं। इस विषय पर लोगों के बीच जागरूकता होना बेहद महत्वपूर्ण है, ताकि हम ऑटोइम्यून बीमारियों पर ग्लूटेन सेंसटिविटी के प्रभाव को समझ सके और उचित देखभाल के साथ जीवन शैली में आवश्यक बदलाव कर खुद को बीमारियों से मुक्त रख सकें।

यह भी पढ़ें : Fitness Resolution 2024 : बिना जिम जाए वेट लॉस करना है, तो इन 5 कामों को करें डेली रुटीन में शामिल

अपनी रुचि के विषय चुनें और फ़ीड कस्टमाइज़ करें

कस्टमाइज़ करें

  • 134
लेखक के बारे में

इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट अंजलि फूड, ब्यूटी, हेल्थ और वेलनेस पर लगातार लिख रहीं हैं। ...और पढ़ें

अगला लेख