International Day of Women and Girls in Science : मिलिए भारत की 5 महिला वैज्ञानिकों से, जिन्होंने विज्ञान में बढ़ाया मान

साइंस और टेक्नोलॉजी तेजी से तब विकास करता है, जब महिलाओं की समान भागीदारी होती है। विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को और अधिक मजबूत करने के लिए 11 फरवरी को दुनिया भर में इंटरनेशनल डे ऑफ़ वीमेन एन्ड गर्ल्स इन साइंस मनाया जाता है।
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भारत की 5 महिला वैज्ञानिक जिन्होंने साइंस और टेक्नोलॉजी में परचम लहराए हैं। चित्र : इंस्टाग्राम
स्मिता सिंह Published: 11 Feb 2024, 09:30 am IST
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महिलाएं और लड़कियां रिसर्च में विविधता लाती हैं। महिलाएं विज्ञान को पेशेवर विस्तार देती हैं। वे साइंस और टेक्नोलॉजी को नए दृष्टिकोण प्रदान करती हैं। इ इससे सभी को लाभ होता है। साइंस और टेक्नोलॉजी में विकास से मानव जाति का कल्याण होता है। आम जनजीवन सुचारू ढंग से चल पाता है। इसलिए साइंस और टेक्नोलॉजी में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाना बहुत जरूरी है।हाल के कुछ वर्षों में भारतीय महिलाओं ने भी साइंस और टेक्नोलॉजी में अपना परचम (women scientist of India) लहराया।

यूनाइटेड नेशंस की पहल (United Nations) 

यूनाइटेड नेशंस ने 11 फरवरी को इंटरनेशनल डे ऑफ़ वीमेन एन्ड गर्ल्स इन साइंस (International Day of Women and Girls in Science-11 February) मनाना शुरू किया।  इन महिलाओं के बारे में जानने (women scientist of India) से पहले जानते हैं क्या है इंटरनेशनल डे ऑफ़ वीमेन एन्ड गर्ल्स इन साइंस (International Day of Women and Girls in Science) ।

क्यों मनाया जाता है इंटरनेशनल डे ऑफ़ वीमेन एन्ड गर्ल्स इन साइंस (International Day of Women and Girls in Science 2024)?

हर साल दुनिया के ज्यादातर देशों में 11 फरवरी को इंटरनेशनल डे ऑफ़ वीमेन एन्ड गर्ल्स इन साइंस (International Day of Women and Girls in Science-11 February) मनाया जाता है। यह दिवस इस बात की याद दिलाता है कि महिलाएं और लड़कियां विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उनकी भागीदारी को और अधिक मजबूत किया जाना चाहिए। इस दिवस की थीम (International Day of Women and Girls in Science 2024 theme )है -महिलाएं और लड़कियों के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के समान अवसर मिलने चाहिए। विज्ञान सभी के लिए खुला होना चाहिए (Bringing Communities Forward for Sustainable and Equitable Development)।

 विज्ञान में महिलाओं की क्या भूमिका है (women scientist in India)?

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के हालिया आंकड़ों से पता चलता है कि 2018-19 में एक्स्ट्रामुरल रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) परियोजनाओं में महिलाओं की हिस्सेदारी 28% थी, जो 2000-01 में 13% थी। अनुसंधान एवं विकास में महिलाओं का अनुपात चार गुना से अधिक बढ़ गया। 2000-01 में यह 232 से बढ़कर 2016-17 में 941 हो गया।

भारत की 5 महिला वैज्ञानिक जिन्होंने साइंस और टेक्नोलॉजी में परचम लहराए हैं (women scientist in India)

1 रितु करिधाल (Ritu Karidhal)

मिशन चंद्रयान-3 के पीछे महिला वैज्ञानिक रितु करिधाल का हाथ रहा है।इसरो ने डॉ. रितु करिधल श्रीवास्तव की अध्यक्षता में भारत के तीसरे चंद्र अन्वेषण रॉकेट चंद्रयान -3 को लॉन्च किया था। यात्रा में 54 महिला वैज्ञानिकों की टीम ने भाग लिया। इसरो के जीएसएलवी मार्क 3 एलवीएम-3 रॉकेट ने मिशन पूरा किया, जिसका लक्ष्य 23 अगस्त को शाम 5:47 बजे चंद्रमा पर सौम्य लैंडिंग करना था। यह उपलब्धि न केवल मून रिसर्च को बढ़ावा देती है, बल्कि अंतरिक्ष विज्ञान में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को भी उजागर करती है। ‘भारत की रॉकेट महिला कहलाने वाली डॉ. रितु करिधल, इसरो के भीतर वैज्ञानिक और एयरोस्पेस इंजीनियर के पद पर हैं। उनके शानदार करियर में भारत के मंगल ऑर्बिटर मिशन, जिसे मंगलयान के नाम से जाना जाता है, के लिए सब संचालन निदेशक की भूमिका भी शामिल है।

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मिशन चंद्रयान-3 के पीछे महिला वैज्ञानिक रितु करिधाल का हाथ रहा है।

2 अनुराधा टी.के. (Anuradha T.k.)

अनुराधा टी.के सम्मानित भारतीय वैज्ञानिक हैं। उन्होंने संचार उपग्रहों में विशेषज्ञता हासिल की। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में वे परियोजना निदेशक रह चुकी हैं। जीसैट-12 और जीसैट-10 जैसे उपग्रहों के सफल प्रक्षेपण प्रयासों में उन्होंने महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई दशकों तक वे सबसे वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक रह चुकी हैं। अनुराधा टी.के. को इसरो में सैटेलाइट प्रोजेक्ट डायरेक्टर की प्रतिष्ठित भूमिका तक पहुंचने वाली पहली महिला होने का गौरव प्राप्त है।

3 दिशा नाइक (Disha Naik)

एयरपोर्ट फायर फाइटर में लैंगिक सीमाओं को तोड़ते हुए दिशा नाइक भारत की पहली महिला एयरपोर्ट फायर फाइटरफायरमैन बन गईं। वे उनका साहसिक कार्य तब शुरू हुआ जब वह मोपा, गोवा में एयरोड्रम रिकवरी और फायरफाइटिंग यूनिट में शामिल हुईं। विमान रिकवरी के लिए क्रैश फायर टेंडर संचालित करने वाली वे पहली महिला बनीं। यह मील का पत्थर न केवल पारंपरिक भूमिकाओं में बदलाव का प्रतिनिधित्व करता है, बल्कि देश में उन्हें विविध और निष्पक्ष अवसर मिलने के सबूत भी देता है।

4 मीनल रोहित (Minal Rohit)

मीनल रोहित प्रतिष्ठित भारतीय वैज्ञानिक और सिस्टम इंजीनियर हैं। वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से संबद्ध हैं। उन्होंने मंगल ग्रह पर मंगलयान अंतरिक्ष जांच की विजयी यात्रा को व्यवस्थित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

निरमा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से अकादमिक ख्याति अर्जित करने के बाद रोहित इसरो के प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचीं। कुशल मैकेनिकल इंजीनियरों की एक टीम के सहयोग से, उन्होंने मार्स ऑर्बिटर मिशन को अपनी विशेषज्ञता प्रदान की। इसमें सिस्टम मॉनिटरिंग और अंतरिक्ष यान की वास्तुकला में जटिल रूप से बुने गए मीथेन सेंसर जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की देखरेख की गई। एमओएम लॉन्च के लिए उन्होंने सिस्टम इंटीग्रेशन इंजीनियर की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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मीनल रोहित प्रतिष्ठित भारतीय वैज्ञानिक और सिस्टम इंजीनियर हैं।

5 मौमिता दत्ता (Moumita Dutta)

मौमिता दत्ता निपुण भारतीय भौतिक विज्ञानी के रूप में प्रतिष्ठित हैं। वे अहमदाबाद में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के प्रतिष्ठित दायरे में वैज्ञानिक या इंजीनियर के रूप में कार्य कर रही हैं।
वे ऑप्टिकल उपकरणों के स्वदेशी विकास में लगी एक समर्पित टीम का नेतृत्व कर रही हैं।वे वे विशेष रूप से इमेजिंग स्पेक्ट्रोमीटर पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। उनका अटूट समर्पण ‘मेक इन इंडिया’ के साथ पूरी तरह मेल खाता है।

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स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।...और पढ़ें

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