क्या थायराइड से ग्रस्त होने पर ब्रेस्टफीडिंग करवानी चाहिए? एक्सपर्ट दे रहीं हैं इस सवाल का जवाब

थायराइड असंतुलन आसामान्य स्थिति है। जिसके कारण बहुत सारे साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। परंतु कई महिलाएं गर्भावस्था के दौरान भी थायराइड असंतुलन का सामना करने लगती हैं।
क्या थायरॉइड में करा सकते हैं ब्रेस्टफीडिंग। चित्र शटरस्टॉक।
निशा कपूर Updated on: 6 August 2022, 21:59 pm IST
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थायराइड एक आम परेशानी है, जो वैश्विक स्तर पर पुरूषों से अधिक महिलाओं को प्रभावित करती है। इस सब में अच्छी बात ये है कि थायराइड (thyroid) होने के बाद भी महिलाएं गर्भधारण कर सकती हैं। लेकिन कहीं न कहीं यह बीमारी तब मुश्किल पैदा करती है, जब एक महिला बच्चे को स्तनपान कराना शुरू करती है। थायराइड रोग का स्तनपान पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। थायराइड ग्लैंड का मुख्य कार्य हार्मोन बनाना है, जो शरीर के विकास और महत्‍वपूर्ण कार्याें में सहायता करता है। इतना ही नहीं यह हार्मोन स्तनपान के लिए भी आवश्यक है। तब क्या थायराइड से ग्रस्त मां को अपने बच्चे को स्तनपान (breastfeeding and thyroid disease) नहीं करवाना चाहिए? आइए जानते हैं इस बारे में सब कुछ।

पहले जानते हैं थायराइड के बारे में

असल में थायराइड दो तरह का होता है। हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म। हाइपोथायरायडिज्म के लक्षणों में थकान, कब्ज, रूखी त्वचा, चेहरे पर सूजन, पीरियड्स में ज्‍यादा ब्‍लीडिंग और हाई ब्लड कोलेस्ट्रॉल शामिल है। वहीं हाइपरथायरायडिज्म में चिंता, पसीना आना, सोने में परेशानी होना और थकान बने रहने जैसे लक्षण नज़र आते हैं। यदि स्तनपान के दौरान यहां बताए गए लक्षणों में से किसी एक का भी अनुभव हो, तो आपको तुरंत अपने थायराइड लेवल की जांच करानी चाहिए।

पहले जानते हैं थायराइड के बारे में. चित्र शटरस्टॉक।

क्या थायराइड के दौरान बच्चे को स्तनपान करवाना चाहिए?

थायराइड से ग्रस्‍त कई महिलाओं को इस बात की चिंता होती है कि यदि उन्होंने बच्चे को स्तनपान कराया, तो कहीं इससे उनका बच्चा भी प्रभावित न हो जाए। ओरा क्लिनिक गुरुग्राम की सीनियर डायरेक्टर डॉ. रितु सेठी के मुताबिक, यदि थायराइड रोग को दवा के साथ अच्छी तरह से नियंत्रित किया जाए, तो स्तनपान कराने में कम परेशानी होती है।

लेकिन यदि हाइपोथायरायडिज्म पर ध्यान न दिया जाए, तो इससे ब्रेस्‍टमिल्‍क की आपूर्ति पर प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे को नर्सिंग करते वक़्त थायराइड की दवा लेनी जरूरी है।

असल में, बच्चे के जन्म के वक़्त और गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर बड़े हार्मोनल बदलावों से गुजरता है। इससे थायराइड के काम में भी बदलाव होते हैं। स्तनपान बच्चे के विकास के लिए सबसे अच्छा है, लेकिन फिर भी कुछ मामलों में स्तनपान कराने से थायराइड ग्लैंड आवश्यकता से अधिक थायराइड हार्मोन का उत्पादन करने लगता है। इससे बच्चे के जन्म के बाद थायरॉयडिटिस हो सकता है।

क्या थायराइड के दौरान बच्चे को स्तनपान करवा सकते हैं। चित्र : शटरस्टॉक

स्तनपान थायराइड से भी बचा सकता है

ब्रेस्‍टफीडिंग, मां और बच्चे दोनों में थायराइड की समस्याओं को रोकने में सहायता कर सकती है। नियमित रूप से स्तनपान कराने से ऑटोइम्यून थायराइड को कंट्रोल करने में सहायता मिल सकती है।

​हाइपरथायराइडिज्‍म के कई मामले हैं, लेकिन कुछ डॉक्‍टरों का मानना है कि महिला को थायराइड ट्रीटमेंट के साथ स्तनपान करवाते रहना चाहिए। स्तनपान के दौरान नवजात शिशु के थायराइड लेवल पर नजर रखें। जब मां थायराइड की कम खुराक लेती है, तो इसका बच्‍चे पर कोई अधिक प्रभाव नहीं पड़ता। पर यदि ट्रीटमेंट में रेडियोएक्टिव आयोडीन या सर्जरी शामिल है, तो बेहतर होगा कि आप बच्‍चे को दूध न पिलाएं।

यह भी रखें ध्यान

थायराइड डिसऑर्डर, हालांकि सामान्य नहीं है, चाहे यह गर्भावस्था से पहले हो या बाद में, दोनों ही प्रकार से आपके लिए परेशानी की वजह होता है। हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म दोनों के अपने साइड इफेक्ट्स हैं। पर ऐसी कई महिलाएं है, जो मेडिकेशन को जारी रखते हुए अपने बच्चे को सुरक्षित रूप से ब्रेस्टफीडिंग करा सकती हैं।

दवाओं की सहायता से दोनों ही कंडीशन का इलाज किया जा सकता है। इसलिए, आपको बच्चे के जन्म के बाद कुछ-कुछ समय पर थायराइड टेस्ट के लिए जाना चाहिए और समय पर दवा लेनी चाहिए।

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लेखक के बारे में
निशा कपूर

देसी फूड, देसी स्टाइल, प्रोग्रेसिव सोच, खूब घूमना और सफर में कुछ अच्छी किताबें पढ़ना, यही है निशा का स्वैग।

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