International Women’s Day: स्वास्थ्य विशेषज्ञों को भी है वीमेन हेल्थ को अलग नजरिए से देखने की जरूरत

Published on: 8 March 2022, 16:53 pm IST

अब भी स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच कई तरह के पूर्वाग्रह प्रचलित हैं। महिलाओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए इन पूर्वाग्रहों को तोड़ना भी जरूरी है।

Ladies ko apni health ke prati aware hona chahiye
महिलाओं को अपने स्वास्थ्य को लेकर जागरूक होना है जरूरी। चित्र:शटरस्टॉक

एक लंबी महामारी और लॉकडाउन से गुजरते हुए भी हम और आप मजबूत बने रहे। पर क्या आप जानती हैं कि महिलाओं के स्वास्थ्य जोखिमों में सिर्फ हार्ट डिजीज, ब्रेस्ट कैंसर या ओबेसिटी ही नहीं हैं, बल्कि वे तमाम पूर्वाग्रह भी हैं, जो महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे पाते। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आपको जानना चाहिए अपनी सेहत के बारे में मौजूद तमाम पूर्वाग्रहों के बारे में। क्योंकि ब्रेक द बायस है, इस बार की थीम।

इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की थीम है “#BreakTheBias”। एक जेंडर इक्वल यानी लिंग समान दुनिया की कल्पना करें। हर प्रकार के पूर्वाग्रह, रूढ़ियों और भेदभाव से मुक्त दुनिया। एक ऐसी दुनिया जो विविध, न्यायसंगत और समावेशी है। वह दुनिया जहां विविधता को महत्व दिया जाता है और उसे जश्न की तरह मनाया जाता है। हम सब मिलकर महिला समानता का निर्माण कर सकते हैं। सामूहिक रूप से हम सभी #BreakTheBias कर सकते हैं।

इस वर्ष का उद्देश्य महिलाओं की उपलब्धि का जश्न मनाना है। पूर्वाग्रह और पिछड़ी मानसिकता के खिलाफ जागरूकता बढ़ाना जरूरी है। इसलिए हमें समानता के लिए कार्रवाई करनी चाहिए।

IWD एक लैंगिक समानता पर आधारित दुनिया बनाने के लिए संकल्प करने का दिन है। महिलाओं की उपलब्धियों का जश्न मनाना और असमानता को दूर करते हुए उनकी तरक्की का समर्थन करना है।

Hormonal badlaaw kayi samasyaon ka kaaran ban sakta hai
हार्मोनल बदलाव कई समस्याओं का कारण बन सकता है। चित्र:शटरस्टॉक

इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आप अकेले, परिवार के साथ या अपने ऑफिस में #BreakTheBias तस्वीरों को भेज सकते हैं। इसके लिए आप अपने हाथों को क्रॉस करके पोज कर सकते हैं और अपनी तस्वीर खिंचवा सकते हैं।

महिलाओं के स्वास्थ्य को लेकर #BreakTheBias

वैश्विक स्वास्थ्य के मामले में लिंग और ताकत मायने रखते हैं। महिलाएं वैश्विक आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं और उनके परिवारों, समुदायों और अर्थव्यवस्था की भलाई पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं। फिर भी महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल में दुनिया भर में असमानता है। बेहतरीन इरादों के बावजूद, स्वास्थ्य के क्षेत्र में जेंडर बायस (gender bias) अभी भी कायम है।

इस भेदभाव का चिकित्सा निदान और महिलाओं को प्राप्त होने वाली स्वास्थ्य देखभाल की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इससे निदान में पर्याप्त देरी होती है, साथ ही गलत निदान और यहां तक ​​कि मृत्यु भी हो जाती है। महिला होने के नाते आप कुछ सबसे चुनौतीपूर्ण स्थितियों के गुजरने के जोखिम में पड़ सकती हैं।

औरतों के स्वास्थ्य लक्षणों को किया जाता है नजरंदाज

लिंग से संबंधित रूढ़िवादिता (gender stereotype) इस बात को प्रभावित कर सकती है कि कैसे एक डॉक्टर बीमारियों का इलाज करता है और अपने रोगियों से कैसे संपर्क करता है। उदाहरण के लिए, ब्रेव मेन एंड इमोशनल वूमेन नामक आर्टिकल में इस धारणा को पुष्ट किया गया है कि डॉक्टर अक्सर पुराने दर्द वाले पुरुषों को ‘बहादुर’ या ‘मूर्ख’ के रूप में देखते हैं।

मगर पुराने दर्द वाली महिलाओं को ‘भावनात्मक’ या ‘हिस्टेरिकल’ के रूप में देखा जाता है। शोध यह भी इंगित करता है कि डॉक्टर महिलाओं के दर्द को शारीरिक स्थिति के बजाय मानसिक स्वास्थ्य स्थिति के उत्पाद के रूप में मानने की अधिक संभावना रखते हैं।

डॉक्टर और डेंटिस्ट का एक सर्वे इसी तरह के निष्कर्षों पर पहुंचा। इनमें से कई स्वास्थ्य पेशेवरों का मानना ​​​​है कि महिलाएं अपने दर्द को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करती हैं।

मेडिकल रिसर्च पर पड़ता है प्रभाव

मेडिकल रिसर्च में असमानता जेंडर स्टीरियोटाइप को पुष्ट करती है। उदाहरण के लिए, पूरे इतिहास में कई वैज्ञानिकों ने माना है कि पुरुषों ने सबसे अच्छा परीक्षण विषय बनाया, क्योंकि उनके मासिक धर्म नहीं होते हैं और वे गर्भवती नहीं हो सकते हैं।

Ye saal aur har saal apni sehat ka khyaal rakhe
ये साल और हर साल आपको अपनी सेहत का ख्‍याल रखना है। चित्र: शटरस्‍टॉक

इसका मतलब यह था कि केवल पुरुष प्रतिभागियों को शामिल करके अनुसंधान की एक बड़ी मात्रा को अत्यधिक सीमित कर दिया गया है। हालांकि, लिंगों के बीच महत्वपूर्ण बायोलॉजिकल अंतर इस बात को प्रभावित कर सकता है कि रोग, दवाएं और अन्य उपचार लोगों को कैसे प्रभावित करते हैं।

नतीजतन, 1990 के दशक से पहले के कई अध्ययन उनके पूर्वाग्रह के कारण त्रुटियों से भरे हुए हैं। इसलिए शोध में जेंडर ब्लाइंडनेस को मिटाना जरूरी है।

महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है भेदभाव का प्रभाव

स्वास्थ्य देखभाल में भेदभाव का समग्र परिणाम यह है कि महिलाओं को उनकी तुलना में बदतर देखभाल मिलती है। जिससे उनकी स्वास्थ्य परेशानियां बढ़ जाती हैं। मेडिकल रिसर्च में समावेश की कमी के कारण ज्ञान में कमी आई है। इसका मतलब है कि डॉक्टर पुरुष स्वास्थ्य की तुलना में महिलाओं और ट्रांस स्वास्थ्य के बारे में कम जानते हैं।

अंत में, यह पूर्वाग्रह उन स्थितियों और कार्यों को जन्म दे सकता है, जो दुर्व्यवहार, उपेक्षा और अंततः मृत्यु के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। चिकित्सा में इस विशाल भेदभाव को दूर करने में मदद करने के लिए नीतियां लागू की जा रही हैं। लेकिन स्पष्ट रूप से अभी भी काफी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

अगर हम इस #BreakTheBias को कर सकते हैं, तो महिलाएं लंबा, स्वस्थ जीवन जी सकती हैं।

लेडीज, क्या आप अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहीं हैं?

हर साल फरवरी को हार्ट मंथ (Heart Month) पर फोकस किया जाता है। यह न केवल अपने, बल्कि अपने प्रियजनों की भलाई पर विचार करने और हृदय रोग को रोकने के लिए अपनी जीवन शैली में सुधार पर बेहतर ध्यान देने का एक अच्छा समय है।

ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन (BHF) का सुझाव है कि कोरोनरी हृदय रोग, स्तन कैंसर से दोगुनी संख्या में महिलाओं की मृत्यु का कारण है। इसलिए महिलाओं के लिए अपने हृदय स्वास्थ्य का ख्याल रखना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

Immunity aur stamina ko badhana aapke haath mein hai
अपनी इम्युनिटी और स्टैमना को बढ़ाना आपके हाथ में है। चित्र: शटरस्‍टॉक

अमेरिकन हार्ट मंथ के संबंध में व्हाइट हाउस के एक बयान के अनुसार, हृदय संबंधी बीमारियां जिनमें हृदय की स्थिति और स्ट्रोक शामिल हैं, भी गर्भावस्था से संबंधित मौतों का एक प्रमुख कारण हैं। जो महिलाओं में सबसे अधिक हैं।

स्वस्थ भविष्य के लिए छोटे-छोटे बदलाव करना है जरूरी

तो आप सभी यह सुनिश्चित करने के लिए क्या कर सकते हैं कि आप स्वस्थ, खुश और अधिक सक्रिय जीवन जी सकें?

1. फिजिकली एक्टिव रहें

आपकी उम्र या स्टैमिना जो भी हो, व्यायाम आपके सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। वास्तव में, नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय और संचार संबंधी बीमारी के विकास के जोखिम को 35% तक कम करने में मदद कर सकती है। अपने दिन से केवल 20 से 30 मिनट व्यायाम करने के लिए समर्पित करें। फिर चाहे वह दौड़ने जाना हो या टहलने, आपके दिल की सेहत में अंतर लाने में मदद कर सकता है।

2. “हम जैसा खाते हैं वैसे ही बनते जाते हैं”

यह अंदर से भी मायने रखता है, और एक स्वस्थ और संतुलित आहार खाने से हृदय और संचार संबंधी बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसमें टाइप 2 डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर शामिल है। बीएचएफ (BHF) का कहना है कि न केवल एक अच्छा आहार स्वस्थ वजन बनाए रखने में मदद कर सकता है, सही चीजें खाने से कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

Apni diet ka rakhe khyaal
स्‍वस्‍थ रहना चाहती हैा, तो अपने आहार का भी ध्‍यान रखें। चित्र: शटरस्‍टॉक

3. स्ट्रेस से बचना भी है जरूरी

तनाव भी महिलाओं के जीवन का एक कारण अभिन्न हिस्सा है। जबकि यह दिल और संचार संबंधी बीमारियों का कारण नहीं है, तनाव अस्वास्थ्यकर आदतों को जन्म दे सकता है, जो आपके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

सारांश

इसलिए लेडीज, अपने स्वास्थ्य पर ध्यान दें। अपना और अपनों का ख्याल रखें। जागरुक होने, सही चुनाव करने और नियमित रूप से व्यायाम करने से स्वस्थ रहने का लक्ष्य रखें। अपना जीवन पूरी खुशी, आजादी और स्वस्थ रूप से जिएं!

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अदिति तिवारी अदिति तिवारी

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