Cannabis, Marijuana or Hemp: आपकी जान जोखिम में डाल सकते हैं, जिन्हें आप स्वैग समझ रहीं हैं 

Published on: 12 June 2022, 12:30 pm IST

दवाओं में इस्तेमाल होने के बावजूद कैनबिस का यदि नशे के तौर पर सेवन करेंगी, तो परिणाम बहुत घातक हो सकते हैं।

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प्रतिबंधित दवा कैनबिस के ज्यादा इस्तेमाल से हो सकती हैं कई स्वास्थ्य समस्याएं। चित्र: शटरस्टॉक

इन दिनों मेरे पड़ोस के कुछ युवा वीकएंड पर गांजा (Cannabis), जिसे मारिजुआना भी कहा जाता है, का खूब सेवन करते हैं। ये नशीले पदार्थ जब नहीं मिलते हैं, तो वे कैनबिस से तैयार गोलियों का इस्तेमाल करने लगते हैं। असल में कैनबिस से तैयार गोलियों या इंजेक्शन का प्रयोग तेज़ दर्द को कम करने या मरीज को बेहोश करने के लिए किया जाता है। जबकि कुछ युवा इसका नशे के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। भारत में यह न केवल गैरकानूनी है, बल्कि आपकी शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य (Cannabis health hazards) के लिए भी घातक है। 

    विशेषज्ञ इसे सीधे तौर पर लेने से साफ मना करते हैं। भारत में बैन होने के बावजूद कैनबिस का क्यों किया जाता है दवाओं में प्रयोग और इसका सेवन किन स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है, यह जानने के लिए हमने बात की आदित्य बिड़ला मेमोरियल हॉस्पिटल, पुणे के जनरल फिजिशियन और नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. रंजीत कुमार यादव से।

क्या हैं कैनबिस 

कैनबिस या गांजा को मारिजुआना के नाम से भी जाना जाता है। इसके बीज और पत्तियों का उपयोग सदियों से पारंपरिक दवाओं के रूप में किया जाता रहा है। हालांकि लोग इसे नशे के तौर पर भी प्रयोग करने लगे हैं। 

नशे के तौर पर स्मोकिंग, वैपर या भाप और अर्क के रूप में भी यह लिया जाता है। इसका नशा करने से मेंटल और फिजिकल हेल्थ दोनों को नुकसान पहुंचता है। यदि गांजे को स्मोक किया जाता है, तो मिनटों में ही इसका प्रभाव व्यक्ति के शरीर पर दिखने लगता है। व्यक्ति की आंखें लाल हो जाती हैं और उसे हेलुसिनेशन (hallucinations) का एहसास होने लगता है। लगातार प्रयोग से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, स्ट्रेस यहां तक कि मेमोरी लॉस की भी समस्याएं होती हैं।

अमेरिका में कई रोगों की दवा है कैनबिस

अमेरिका की नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज, इंजीनियरिंग और मेडिसिन के अनुसार, कैनबिस या कैनबिनोइड्स को पुराने दर्द, कीमोथेरेपी के बाद उल्टी जैसा लगने पर या मल्टीपल स्केलेरोसिस, जिसमें रोगी अपने शरीर पर नियंत्रण खोने लगता है, के इलाज में उपयोगी माना जाता है। इसके अलावा, स्लीप एपनिया, फाइब्रोमायल्गिया, नींद की समस्याओं में भी इससे मदद मिलती है।

भारत में ही होता है पेन किलर के रूप में इस्तेमाल 

आम लोगों के लिए भारत में कैनबिस की खेती या कैनबिस का प्रयोग कानूनी रूप से निषिद्ध है।

डॉ. रंजीत बताते हैं, “भारत में कैनबिस पूरी तरह प्रतिबंधित हैं। मेडिसनल यूज के लिए सरकार से लाइसेंस लेना जरूरी होता है।

कैनबिस का इस्तेमाल कभी भी सीधे तौर पर नहीं किया जा सकता है। यह मादक पदार्थों(Opioids) की श्रेणी में आता है। इसका प्रयोग टेबलेट या इंजेक्शन के तौर पर किया जाता है। पेशेंट को बेहोश करने और दर्दनिवारक (Analgesic) के तौर पर कैनबिस दिया जाता है।’ 

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बिना डॉक्टर की सलाह पर नियमित तौर पर ज्यादा मात्रा में यदि दवा ली जाती है, तो वह नशा बन जाता है। चित्र:शटरस्टॉक

यह अलग-अलग इंजेक्शन और अलग-अलग रोगों के इलाज के तौर पर चिकित्सा जगत में प्रयोग किया जाता है। इसे तैयार माॅर्फीन इंजेक्शन और फैंटानिल इंजेक्शन के तौर पर दिया जाता है, जो पेनकिलर्स के रूप में जाने जाते हैं। मरीज को बेहोश करने के लिए इसका प्रयोग अधिक किया जाता है। यह ट्रामाडोल के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। ट्रामाडोल गंभीर दर्द से राहत दिलाता है। 

ट्रामाडोल मुख्य रूप से मस्तिष्क के दर्द रिसेप्टर को बाधित कर देता है, जिससे दर्द का एहसास नहीं हो पाता है। बहुत तेज दर्द या ऑपरेशन के बाद अत्यधिक पीड़ा या फिर रोगी को बेहोश करने के लिए भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। 

सेल्फ यूज से हो सकती हैं कई स्वास्थ्य समस्याएं

बिना चिकित्सकीय परामर्श के निजी तौर पर कैनबिस का सेवन करने से चक्कर आना, हमेशा नींद जैसा लगना, उल्टी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। 

इसके अधिक सेवन से एंग्जाइटी, डिप्रेशन, स्ट्रेस यहां तक कि मेमोरी लॉस की भी समस्याएं हो सकती हैं। 

वहीं ट्रामाडोल के इस्तेमाल से हाइपोग्लाइसेमिया का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में ब्लड शुगर लेवल घट जाता है। 

जरूरी बात

डॉ रंजीत कुमार यादव चेतावनी देते हैं बहुत सारी चीजें ऐसी हैं, जो दवा के रूप में सीमित मात्रा में और विशेषज्ञ देखरेख में इस्तेमाल की जाती हैं। रोगी की मानसिक चेतना को थोड़ी देर के लिए बाधित करना कभी-कभी जरूरी हो जाता है। पर नशे के रूप में इनका सेवन किसी के भी स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इसलिए जरूरी है कि किसी भी प्रकार के लालच में आए बिना इन चीजों से दूर रहें। 

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स्मिता सिंह स्मिता सिंह

स्वास्थ्य, सौंदर्य, रिलेशनशिप, साहित्य और अध्यात्म संबंधी मुद्दों पर शोध परक पत्रकारिता का अनुभव। महिलाओं और बच्चों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करना और नए नजरिए से उन पर काम करना, यही लक्ष्य है।

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