Monkeypox : जानिए क्या है ये खतरनाक बीमारी जिसके लक्षण कोरोनावायरस से मिलते-जुलते हैं

Updated on: 19 May 2022, 16:19 pm IST

तेज बुखार, सिर दर्द और गले में कफ के साथ शुरू होने वाली इस बीमारी का प्रसार अफ्रीकी और यूरोपीय देशों में होने लगा है। इसलिए जरूरी है कि आप इसके बारे में जानें और सतर्क रहें।

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इन दिनों मंकीपॉक्स का खतरा तेजी से बढ़ रहा है तो बैग पैक करने के पहले हो जाएं अपडेट । चित्र : शटरस्टॉक

दुनिया भर में मंकीपॉक्स वायरस तेजी से पांव पसार रहा है। बीते दिनों यूरोप में 7 मामले की पुष्टि होने के बाद अब अमेरिका के मैसाचुसेट्स डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ ने एक अन्य में मंकीपॉक्स वायरस के मिलने की जानकारी दी है। उत्तरी अमेरिका और यूरोप की हेल्थ एजेंसियों ने इस साल मई की शुरुआत से मंकीपॉक्स वायरस (Monkeypox Virus) के दर्जनों संदिग्ध और करीब 8 कन्फर्म मामलों की पुष्टि की है। वहीं अफ्रीका से सटे हुए यूरोप के कई अहम हिस्सों जैसे स्पेन और पुर्तगाल में बीते बुधवार को आधिकारिक घोषणा कर 40 से अधिक मंकीपॉक्स वायरस के संदिग्ध मामलों की जानकारी दी गई है। लोगों के बीच इन दिनों तेजी से बढ़ रहे मामलों को देखते हुए आइए जानें मंकीपॉक्स वायरस की पूरी डिटेल।

पचास साल पुराना है वायरस

मानव में मंकीपॉक्स का पहला मामला 50 साल पहले पाया गया था। साल 1970 में अफ्रीका के कांगो रिपब्लिक में मंकीपॉक्स का पहला मामला दर्ज किया गया था। डब्ल्यूएचओ का कहना है कि ब्लड, बॉडी लिक्विड या संक्रमित जानवरों के त्वचीय या म्यूकोसल घावों के सीधे संपर्क या उनका मांस खाने से हो सकता है। चूहा बंदर जैसे रोडेंट के आलावा, गिलहरी, डॉर्मिस, प्राइमेट्स और अन्य स्पेसीज में भी मंकीपॉक्स का वायरस देखा जा चुका हैं।

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल की रिपोर्ट बताती हैं कि अफ्रीका प्रांत के कांगो रिपब्लिक से मंकीपॉक्स वायरस के संकमण की शुरुआत हुई। जनवरी 2017 में भी कांगो के मैनफौएट में रहने वाले एक शिकारी में इस वायरस का संक्रमण मिला। उस साल नवंबर आते-आते दुनियाभर में मंकीपॉक्स के 88 संदिग्ध मामले पाए गए और इस संक्रमण की चपेट में आने से 6 की जान भी जा चुकी थी। मंकीपॉक्स संक्रमण के कारण जान गवाने वालो में से एक शख्स मैनफौएट का भी रहने वाला था।

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मंकीपॉक्स क्या हैं ?

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल के मुताबिक, यह एक अजीबोगरीब बीमारी है जो लोगों में मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण के कारण फैलती है। इस वायरस का ताल्लुक पॉक्सवाइरीडी फैमिली (family Poxviridae) के आर्थोपॉक्स वायरस जीनस (Orthopoxvirus genus) से है। सामान्यत: मंकीपॉक्स का वायरस चूहों, बंदरों और अन्य रोडेंट एनिमल (rodents animal) में मौजूद होता है। लेकिन अब इसका संक्रमण मनुष्यों में भी तेजी से फैलने लगा है।

वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार, जानवरों से मनुष्यों की प्रजाति में मंकीपॉक्स जैसी अन्य बीमारी मुख्य रुप से सेंट्रल अफ्रीका और वेस्ट अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय वर्षावन इलाकों (tropical rainforest areas) में फैल रहा है। कभी-कभार इन्हीं इलाकों से लोगों या जानवरों के जरिए बाकी क्षेत्रों में फैल जाता है।

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क्या हैं मंकीपॉक्स के लक्षण

मंकीपॉक्स बीमारी के लक्षण स्मालपॉक्स यानी चेचक से फाफी मिलते-जुलते हैं। जिन लोगों में मंकीपॉक्स वायरस का संक्रमण हो जाता है, सामान्यतः उनमें बुखार, त्वचा पर दाने यानी चकत्ते, तेज सिरदर्द, पीठ दर्द, मांसपेशियों में दर्द, शरीर में अचानक काफी कमजोरी, लिंफ नोड में सूजन और अन्य लक्षण नजर आते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, मंकीपॉक्स संक्रमित मरीजो में त्वचा फटने की शिकायत होती है। और एक से तीन दिन के भीतर उन्हें बुखार आती है। और चेहरे पर छोटे-छोटे दाने यानी चकत्ते बड़ी संख्या में उभरते हैं। इसके आलावा उनके हथेलियों और पैर के तलवे पर भी चकत्ते दिखाई देते हैं। साथ ही इस संक्रमण से संक्रमित शख्स के जननांगों, मुंह, आंख भी प्रभावित होते हैं।

मंकीपॉक्स वायरस का इनफेक्शन हो जाने करीब बाद, करीब 6 से 13 दिनों तक मरीजों में ये सब लक्षण नजर आते हैं लेकिन कुछ लोगों में संक्रमण के 5 दिन बाद से लेकर 21 दिनों तक लक्षण दिखाई देते हैं।

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लोगों में कैसे फैलता है मंकीपॉक्स

युनाइटेड किंगडम हेल्थ सेक्यूरिटी एजेंसी का कहना है कि मंकीपॉक्स एक रेयर वायरल इनफेक्शन है जो बिना खास उपचार के या अपने आप कुछ दिन बाद ठीक हो जाता है। सीडीसी के अनुसार, इस बीमारी की खोज 1958 में हुई थी। दरअसल एक शोध के लिए रखे गए बंदरों की कालोनियों में चेचक जैसी दो तरह की बीमारी नजर आई तो एक का नाम मंकीपॉक्स रख दिया गया।

WHO के मुताबिक, इसका संक्रमण लोगों में संक्रमित व्यक्ति या चुहे, बंदर जेैसे जानवर के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। संक्रमित जीव के बॉडी लिक्विड या ब्लड के सीधे संपर्क में आने या फिर उसका कच्चा मांस व अन्य खाने से मंकीपॉक्स हो जाता है।

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क्या है इसका उपचार

युनाइटेड किंगडम हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी का कहना है कि मंकीपॉक्स के ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिसमें मंकीपॉक्स वायरस की चपेट में आने के बाद कुछ ही सप्ताह बाद ज्यादातर इससे संक्रमित लोग खुद-ब-खुद ठीक हो चुके हैं। एजेंसी ने लोगों से ये भी बताया कि कुछ मामलों में मंकीपॉक्स वायरस का संक्रमण घातक भी हो सकता है।

यूके हेल्थ सेक्यूरिटी एजेंसी में क्लिनिकल एंड इमर्जिंग इनफेक्शन के डायरेक्टर डॉ कोलिन ब्रॉउन ने बीते शनिवार को इस बात पर जोर देते हुए कहा कि मंकीपॉक्स का संक्रमण लोगों में आसानी से नहीं फैलता। इसलिए सामान्य लोगों में इसका खतरा भी कम है।

मौजूदा समय में डब्ल्यूएचओ की तरफ से मंकीपॉक्स के लिए कोई खास उपचार की सिफारिश नहीं की गई है।

क्या है भारत में मंकी पॉक्स की स्थिति

फिलहाल भारत में अभी तक इसके एक भी मामले की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन मामलों को लेकर बहुत ज्यादा घबराने की जरूरत नहीं है। पर यह जरूरी है कि कोरोनावायरस से बचाव के लिए अपनाई जा रही गाइडलाइंस का पालन करें। अगर किसी व्यक्ति में इसके लक्षण नजर आएं, तो आइसोलेशन सबसे पहला कदम होना चाहिए।

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स्मालपॉक्स की वैक्सीन है मंकीपॉक्स के खिलाफ असरदार

चेचक यानी स्मालपॉक्स को रोकने के लिए लगवाया गया वैक्सीन करीब 85 फीसदी मंकीपॉक्स के खिलाफ प्रभावी पाया गया है। यही कारण है कि जिन लोगों ने बचपन में चेचक के खिलाफ टीकाकरण करवाया है, उनमें मंकीपॉक्स के गंभीर लक्षण नहीं नजर आ रहे हैं।

यह भी जानें

बता दें कि अफ्रीका के कई हिस्सों में ये बीमारी तेजी से फैल रही है। ब्रिटेन के इग्लैंड में कन्फर्म किए गए पहले मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमित मामले का संबंध भी अफ्रीका के नाइजीरिया से बताया गया। बुधवार को उत्तरी अमेरिका के मैसाचुसेट्स डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ की तरफ से जिस शख्स के संक्रमित पाए जाने की जानकारी दी गई दरअसल वह पीड़ित व्यक्ति भी हाल ही में उत्तरी अमेरिका के एक देश कनाडा की यात्रा से वापस लौटा था।

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मिथिलेश कुमार पटेल मिथिलेश कुमार पटेल

भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से पत्रकारिता में डिप्लोमा कर चुके मिथिलेश कुमार सेहत, विज्ञान और तकनीक पर लिखने का अभ्यास कर रहे हैं।

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