केवल स्वाद ही नही, सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है कुल्हड़ वाली चाय

Published on: 7 July 2022, 08:00 am IST

देश भर में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लग चुका है। पर हमारे पास चाय पीने के लिए एक ऐसा विकल्प मौजूद है जो हेल्दी भी है।

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सेहत के लिए फायदेमंद होती है कुल्हड़ वाली चाय. चित्र शटरस्टॉक।

मिट्टी के कुल्हड़ तब से चले आ रहे हैं, जब किसी और अन्य डिस्पोजेबल उत्पाद के बारे में हमने सुना भी नहीं था। इसमें चाय, लस्सी, दही, छाछ आदि पीने का मजा ही अलग है। इनकी खास सौंधी महक एक अलग तरह का स्वाद घोल देती है। वहीं जब गरम-गरम चाय जब कुल्हड में जाती है, तो चाय की खुशबू आपके मूड को फ्रेश कर देगी। क्या कभी आपने सोचा है कि क्यों इतना लजीज लगता है इनमें चाय या छाछ पीना! क्या मिट्टी से बने ये कुल्हड़ सेहत के लिए भी फायदेमंद हैं? तो जवाब है हां! कुल्हड़ में कई ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकते हैं। साथ ही इसमें चाय पीने से चाय की गुणवत्ता बढ़ जाती है। चलिए जानते हैं किस तरह कुल्हड़ (Kulhad chai benefits) सेहत के लिए फायदेमंद हैं।

सेहत के लिए खतरनाक हैं प्लास्टिक के गिलास

कई लोग चाय पीने के लिए प्लास्टिक या शीशे के गिलास का प्रयोग करते है। जबकि प्लास्टिक के डिस्पोजेबल गिलास आपकी सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर सकते हैं। इससे बैक्टीरियल इन्फेक्शन से लेकर पाचन संबंधी समस्याएं तक हो सकती हैं। प्लास्टिक गिलास में जब गरम चाय डाली जाती है, तो उसमे में मौजूदा केमिकल हीट के कारण चाय में घुल जाते हैं, जिसकी वजह से कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी होने की संभावना होती है। इसलिए जितना हो सके उतना इसके प्रयोग से बचने का प्रयास करें।

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प्लास्टिक गिलास में चाय पिने से होते है यह नुकसान। चित्र : शटरस्टॉक

इस बारे में क्या कहते हैं रिसर्च

रिसर्चगेट द्वारा प्रकाशित एक शोध के अनुसार मिट्टी से बने बर्तन में किसी भी तरह के खाद्य पदार्थ को खाना या पीना सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। मिट्टी के बर्तन में बना खाना हमारी संस्कृति को भी उल्लेखित करता है। यही नहीं मिट्टी का बर्तन भोजन के स्वाद को भी दुगना कर देता है। रिसर्च में बताया गया कि मिट्टी के बर्तन में मौजूद कैल्शियम खाद्य पदार्थों के साथ मिलकर आपके शरीर में जाते हैं।

जब आप मिट्टी के बर्तन में खाना बनाती हैं तो ये खाने के माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को प्रिजर्व करके रखता है। उसी प्रकार कुल्हड़ की चाय में भी जरूरी पोषक तत्व प्रिजर्व रहते हैं। अध्ययन में आगे बताया गया कि कॉपर और सिल्वर के बर्तन भी काफी ज्यादा फायदेमंद होते हैं, परंतु यह इतने ज्यादा महंगे हैं कि सभी लोग इसे नियमित रूप से प्रयोग नहीं कर सकते। ऐसे में मिट्टी से बना बर्तन सभी के लिए सबसे हेल्दी और बजट फ्रेंडली विकल्प है।

यहां है कुल्हड़ में चाय पीने के 4 महत्वपूर्ण फायदे

1. कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत है

मिट्टी में पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम मौजूद होता है, इसलिए कुल्हड़ में चाय पीने से शरीर को एक सीमित मात्रा में कैल्शियम प्राप्त होता है। मिट्टी के कुल्हड़ शरीर के एसिडिक नेचर को कम करते हैं। साथ ही गैस तथा एसिडिटी जैसी समस्याओं में भी कारगर हैं।

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मिट्टी के बर्तन कैल्शियम का एक अच्छा स्रोत होते हैं। चित्र: शटरस्‍टॉक

2. हानिकारक बैक्टीरिया से बचाते हैं

कांच या प्लास्टिक के गिलास की जगह कुल्हड़ एक स्वस्थ विकल्प है। ज्यादातर बाहरी चाय की दुकानों पर कांच के गिलास को अच्छी तरह नहीं धुलते और यदि धुलते भी है तो उन में हानिकारक बैक्टीरिया उत्पन्न हो जाते हैं। जब हम उसी कांच के गिलास में चाय पीते हैं, तो बैक्टीरिया के संपर्क में आने की संभावना बढ़ जाती है और यह हमारे पेट में जाकर सेहत को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।

मिट्टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते, इस वजह से कुल्हड़ में चाय पीने से किसी तरह के इंफेक्शन और एलर्जी की संभावना नहीं होती। वहीं यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है।

3. पाचन के लिए फायदेमंद होती है कुल्हड़ की चाय

डिस्पोजेबल या अन्य प्लास्टिक के गिलास में चाय पीने से आपकी सेहत बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। अन्य प्लास्टिक गिलास में मौजूद केमिकल गर्म होने पर चाय के साथ मिक्स हो जते हैं, जिस वजह से सेहत को नुकसान पहुंचता है।

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यह पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद है। चित्र ; शटरस्टॉक

4. इको फ्रेंडली होते है कुल्हड़

प्लास्टिक के गिलास में चाय पीना सेहत के साथ-साथ वातावरण के लिए में नुकसानदेह होता है। ऐसे में कुल्हड एक बेहतर विकल्प रहेगा। यह वातावरण और आपकी सेहत दोनों के लिए नुकसानदेह है। मिट्टी से बना यह कुल्हड प्रयोग में आने के बाद वापस मिट्टी में तब्दील हो जाता है। आपको बता दें कि फिजूल में प्रयोग में लाई गई प्लास्टिक इधर-उधर फेंक दी जाती हैं, और अक्सर जानवर खासकर गाय इसे खा लिया करती हैं। इस वजह से जानवरों की सेहत खराब होने के साथ ही उनसे प्राप्त किए गए खाद्य पदार्थ भी हानिकारक हो सकते हैं।

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अंजलि कुमारी अंजलि कुमारी

इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी- नई दिल्ली में जर्नलिज़्म की छात्रा अंजलि फूड, ब्लॉगिंग, ट्रैवल और आध्यात्मिक किताबों में रुचि रखती हैं।

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