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‘वेरिएंट ऑफ कंसर्न’ ओमिक्रॉन भारत में तेजी से पैर पसार रहा है! एक विशेषज्ञ डॉक्टर दे रहे हैं इस बारे में महत्वपूर्ण जानकारियां

Published on:6 December 2021, 17:04pm IST
डेल्टा वेरिएंट की तबाही के बाद अब कोविड-19 का ओमिक्रॉन रूप दिख रहा है। हाल ही में हुए शोध के आधार पर हम आपको बता रहें हैं एक्सपर्ट की राय।
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'वेरिएंट ऑफ कंसर्न' ओमिक्रॉन भारत में तेजी से पैर पसार रहा है! चित्र:शटरस्टॉक

26 नवंबर 2021 को, WHO के टेक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन वायरस इवोल्यूशन (TAG-VE) की सलाह पर वेरिएंट ओमिक्रॉन को चिंताजनक करार दिया है। यह निर्णय TAG-VE को प्रस्तुत किए गए सबूतों पर आधारित था कि ओमिक्रॉन में डेल्टा के मुकाबले कई म्यूटेशन हैं जो इस पर प्रभाव डाल सकते हैं। यह इसके व्यवहार को भी तय करता है। उदाहरण के लिए, यह कितनी आसानी से फैलता है या बीमारी की गंभीरता का कारण बनता है। वर्तमान में इससे संबंधी बहुत जानकारी नहीं है। लेकिन हम एक्सपर्ट की मदद से आपको मौजूदा स्थिति बता रहें हैं। 

कितना खतरनाक है ओमिक्रॉन ?

ओमिक्रॉन की संक्रामकता को घातक या माइल्ड के अनुसार वर्गीकृत नहीं किया जा सकता है। अभी इससे संबंधित पूरी जानकारी कुछ समय बाद ही पता चलेगी। वायरोलॉजिस्ट अधिक डेटा का अध्ययन करने के बाद ही जानकारी दे पाएंगे। 

लेकिन वर्तमान में हम कुछ अनुमान लगा सकते हैं।  यदि ओमिक्रॉन , डेल्टा की तुलना में हल्के लक्षण दिखाता है, तो निश्चित रूप से यह अच्छी खबर है। इसके साथ ही अगर यह डेल्टा की तुलना में अधिक तेज़ी से फैलता है, तो यह सोने पर सुहागा होगा। 

रॉकफेलर फाउंडेशन के महामारी निवारण संस्थान के सैमुअल स्कारपिनो का कहना है कि, जब किसी वाइरस के दो संस्करण (म्यूटेशन) एक वक्त पर किसी जन समूह पर आक्रमण करते हैं तो जो अधिक लोगों को ज्यादा तेज़ी से संक्रमित करता है, वह हावी हो जाता है और दूसरे को फैलने का अवसर नहीं देता है। अब चूंकि वायरस का यह म्यूटेशन  माइल्ड है, अत: हानी कम होगी तथा शरीर मे वैक्सीन या डेल्टा संक्रमण के इन्फेक्शन से प्राप्त इम्युनिटी इसे खत्म कर देगी। 

पूर्व कोविड-19 संक्रमण और ओमिक्रॉन 

प्रारंभिक साक्ष्य बताते हैं कि अन्य प्रकारों की तुलना में ओमिक्रॉन से पुन: संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। यानी, जिन लोगों को पहले कोविड-19 था, वे ओमिक्रॉन से अधिक आसानी से पुन: संक्रमित हो सकते हैं। आने वाले दिनों में इसकी और जानकारी मिल सकती है। 

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कोविड-19 का नया स्ट्रेन ओमिक्रोन भारत में प्रवेश कर चुका है। चित्र:शटरस्टॉक

कुछ कारकों के आधार पर जानिए कोविड-19 संक्रमणों में फर्क

1. टीकों की प्रभावशीलता

डब्ल्यूएचओ तकनीकी भागीदारों के साथ काम कर रहा है ताकि टीकों सहित हमारे मौजूदा वेक्सीन के संभावित प्रभाव की जानकारी मिल सके। गंभीर बीमारी और मृत्यु को कम करने के लिए टीके महत्वपूर्ण  हो सकते हैं ऐसा वैज्ञानिकों का मानना है।  देखा गया है कि वैक्सीन डेल्टा वेरिएंट से भी गंभीर बीमारी और मृत्यु के खिलाफ प्रभावी हैं।

2. आरटी पीसीआर (RT-PCR) टेस्ट

यह निर्धारित करने के लिए अध्ययन जारी हैं कि क्या रैपिड एंटीजन डिटेक्शन टेस्ट (RT-PCR) सहित अन्य प्रकार के परीक्षणों पर इस ओमिक्रॉन का क्या प्रभाव है। इसके अलावा ओमिक्रॉन संक्रमण की पुष्टि करने के लिए पॉजिटिव रिपोर्ट को जीनोम स्कीक्वेंसिंग के लिए भेजा जाता है। 

3. उपचारों में फर्क

कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और IL 6 रिसेप्टर ब्लॉकर्स अभी भी गंभीर कोविड-19 के रोगियों के प्रबंधन के लिए प्रभावी होंगे। अन्य उपचारों का मूल्यांकन यह देखने के लिए किया जाएगा कि क्या वे ओमिक्रॉन संस्करण में वायरस के कुछ हिस्सों में परिवर्तन को देखते हुए अभी भी उतने ही प्रभावी हैं या नहीं।

4. संक्रमण फैलने की तेजी 

यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि डेल्टा सहित अन्य प्रकारों की तुलना में ओमिक्रॉन अधिक पारगम्य है। इस प्रकार से प्रभावित दक्षिण अफ्रीका के क्षेत्रों में सकारात्मक परीक्षण करने वाले लोगों की संख्या बढ़ी है। लेकिन यह समझने के लिए महामारी विज्ञान के अध्ययन अभी भी चल रहा है। 

5. रोग की गंभीरता

यह अभी तक स्पष्ट नहीं है कि डेल्टा सहित अन्य प्रकार के संक्रमणों की तुलना में ओमिक्रॉन से संक्रमण अधिक गंभीर बीमारी का कारण बनता है या नहीं। प्रारंभिक आंकड़ों से पता चलता है कि दक्षिण अफ्रीका में अस्पताल में भर्ती होने की दर बढ़ रही है। यह ओमिक्रॉन के साथ विशिष्ट संक्रमण के कारण हो सकता है। 

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टीकाकरण को पूरा करें। चित्र:शटरस्टॉक

वर्तमान में यह सुझाव देने के लिए कोई जानकारी नहीं है कि ओमिक्रॉन से जुड़े लक्षण अन्य प्रकारों से भिन्न हैं। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार हल्की बीमारी के लक्षण देखे गए हैं। लेकिन ओमिक्रॉन संस्करण की गंभीरता के स्तर को समझने में कई दिनों से लेकर कई सप्ताह तक का समय लगेगा।

ओमिक्रॉन से बचाव के लिए जनता को निर्देश

कोविड-19 वायरस के प्रसार को कम करने के लिए आप जो सबसे प्रभावी कदम उठा सकते हैं, वे हैं:  

  • दूसरों से कम से कम 2 मीटर की शारीरिक दूरी बनाए रखना।  
  • अच्छी तरह से फिट होने वाला मास्क पहनें।  
  • वेंटिलेशन में सुधार के लिए  खिड़कियां खुली रखें।  
  • वातानुकूलित कमरे इस्तेमाल न करें। 
  • भीड़-भाड़ वाली जगहों से बचें।  
  • हाथ साफ रखें।  
  • खांसते-छींकते हुए भी कोविड अनुरूप व्यवहार रखें। 
  • मुड़ी हुई कोहनी या बाजू में खांसें या छींकें।  
  • जब बारी हो तब टीका लगवाएं। 

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Dr. S.S. Moudgil Dr. S.S. Moudgil

Dr. S.S. Moudgil is senior physician M.B;B.S. FCGP. DTD. Former president Indian Medical Association Haryana State.