क्या त्योहारी मौसम में आ सकती है कोविड-19 की तीसरी लहर? एक विशेषज्ञ कर रहे हैं विश्लेषण

Updated on: 25 October 2021, 16:55 pm IST

विशेषज्ञ और विभिन्न अध्ययन मान रहे हैं कि कोरोनावायरस कहीं नहीं गया। वह बस आपकी इम्युनिटी के कमजोर पड़ने और भीड़ के लापरवाह होने का इंतजार कर रहा है।

Festive season me apko aur bhi zyada sawdhan rahne ki zarurat hai
त्योहारी मौसम में आपको और भी ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। चित्र: शटरस्टॉक

कोरोना (Coronavirus) आया सब जानते हैं, लेकिन क्या यह कब जाएगा? यह वास्तव में लखटकिया सवाल है। दुनिया के शीर्ष वायरोलॉजिस्ट और डब्ल्यूएचओ (WHO) हमें बताते हैं कि यह अब रहने वाला है और हमें इसके साथ रहना सीखना होगा। सबसे ज्यादा चिंता है त्योहारी मौसम (Festival Season) की।

विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि अगर इस दौरान जरा भी लापरवाही बरती तो कोविड-19 की तीसरी लहर (Covid-19 third wave) आने से कोई नहीं रोक पाएगा। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

क्या अन्य बीमारियों से अलग है कोविड-19 ? 

हमने घातक चेचक पर विजय प्राप्त कर ली है। किसी व्यक्ति का जीवन बहुत हद तक अक्षम बना देने वाले पोलियो को भी लगभग समाप्त कर दिया है। तो कोरोना या कोविड-19 में ऐसा क्या खास है।

जी हां यह वाकई खास है, इस तथ्य को समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि वायरस की उत्पत्ति 2 प्रकार की होती है। मानव वायरस और पशु वायरस। चेचक और पोलियो वायरस दोनों ही मानव वायरस हैं। जबकि एड्स, बर्ड फ्लू, इबोला, एमईआरएस और कोविड सहित लगभग सभी अन्य वायरस जानवरों की उत्पत्ति के हैं।

प्रमुख विषाणु विज्ञानी डॉ. शाहिद जमील के अनुसार, इन्फ्लुएंजा स्थानिक है, चेचक के विपरीत, जिसे समाप्त कर दिया गया है।

दो अलग तरह के होते हैं वायरस

डॉ जमील कहते हैं, “केवल उन रोगजनकों को मिटाया जा सकता है, जिनके पास मेजबान के रूप में जानवर (अन्य प्रजाति) नहीं हैं। चेचक और पोलियो मानव वायरस के उदाहरण हैं, रिंडरपेस्ट एक मवेशी वायरस है। इसका मतलब यह है कि अगर चमगादड़, ऊंट या सिवेट कैट जैसे किसी जानवर मेजबान में रोगजनक ( Virus) मौजूद हैं, तो यह एक बार या बार फिर से संचारित हो सकता है।

Coronavirus anye virus se alag hai
नये कोरोनावायरस स्ट्रेन के हैं नये लक्षण. चित्र : शटरस्टॉक

खास तौर पर तब जब उस विशेष आबादी में इसके कारण होने वाली बीमारी के खिलाफ प्रतिरक्षा का स्तर कम हो जाता है।”

डॉ जमील आगे कहते हैं, “कोरोनावायरस बीमारी के मामले में, यह फैलता रहेगा, क्योंकि यह पशु मेजबान में मौजूद है। इसका मतलब यह भी है कि यह इस हद तक बीमारी का कारण बनेगा कि लोगों इसके खिलाफ कोई वैक्सीन या जोखिम नहीं ले पाए हैं।

हालांकि, पर्याप्त लोगों को टीका लगाया गया है या संक्रमण के संपर्क में आ गए हैं, तो वायरस रोगसूचक संक्रमण का कारण बनेगा, लेकिन रोग नहीं। इसलिए, जिसे स्थानिक एपिडेमिक माना जाता है, यह वहां है। लेकिन भयानक बीमारी पैदा नहीं कर रहा है।”

यहां है पेंडेमिक (Pandemic), एपिडेमिक (Epidemic) और एंडेमिक (Endemic) का अंतर 

महामारी यानी पेंडेमिक (Pandemic)

इसको समझने का एक सरल तरीका है, जिसका अर्थ है पी या पासपोर्ट। महामारी एक देश से दूसरे देश में जा सकती है यानी इसे भी यात्रा हेतु पासपोर्ट चाहिए ।

एपिडेमिक (Epidemic)

महामारी एक भू भाग में सक्रिय रूप से फैल रही है। बीमारी के नए मामले उम्मीद से ज्यादा आए हैं। अधिक व्यापक रूप से, इसका उपयोग किसी भी ऐसी समस्या का वर्णन करने के लिए किया जाता है, जो नियंत्रण से बाहर है, जैसे कि पुराने वक्तों में हैजा व “चेचक की महामारी।”

एंडेमिक (Endemic) 

कुछ रोग किसी आबादी में हमेशा पाए जाते हैं, लेकिन एपिडेमिक (endemic) वह अवस्था है जब उस क्षेत्र में संक्रमित लोगों की संख्या सामान्य से बहुत अधिक होने लगती है। उदाहरण के लिए, जब कोविड-19 चीन के वुहान तक सीमित था, तब वह एक महामारी थी। भौगोलिक प्रसार ने इसे महामारी में बदल दिया।

दूसरी ओर, स्थानिक स्थानिक बीमारी का अर्थ एक विशेष स्थान पर एक निरंतर उपस्थिति हैं। सामान्य सर्दी फ्लू वायरस। यह आमतौर पर सर्दियों में होता है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति कमजोर हो जाता है और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है, तो उसे यह गर्मियों में भी हो सकता है।

कोरोना के मामले में क्या है भारत की स्थिति

डब्ल्यूएचओ के मुख्य वैज्ञानिक डॉ स्वामीनाथन कहते हैं कि भारत इस समय महामारी के उस चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां वह हर समय मौजूद रहने वाली है। प्रतिरक्षा कम होते ही यह पुन: आक्रमण करेगी और भविष्य की लहरों का कारण बन सकती है।

जैसे पुराने समय में राजा के दुश्मन राजा के दुर्ग का घेरा डालकर बैठ जाते थे। उसकी रसद आमद रोक कर उसे कमजोर कर देते थे और जब वह बाहर आता तो कमजोर पाकर दबोच लेते थे |

India me coronavirus ab bhi sakriya hai
भारत में कोरोनावायरस अब भी सक्रिय है। चित्र : शटरस्टॉक

स्थानिकता या एंडेमिक क्या है?

एंडेमिक का मतलब कुछ ऐसा है जो हर समय मौजूद रहता है। उदाहरण के लिए, इन्फ्लूएंजा स्थानिक है, चेचक के विपरीत, जिसे मिटा दिया गया है।

SARS-CoV-2 के स्थानिक होने की संभावना कब है?

डॉ जमील ने कहा, और इस बारे में कोई स्पष्ट जवाब नहीं है कि वायरस के स्थानिक होने की संभावना कब है। “वायरस स्थानिक हो गया है या नहीं, इस मुद्दे पर फंसने के बजाय, टीकाकरण और सीमित संचरण पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।

यह भविष्यवाणी करना संभव नहीं है कि वायरस कब स्थानिक होने वाला है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि यह कितनी तेजी से फैलता है और बदलता (Mutate) है। कितने वेरियंट हैं इस पर ध्यान रखना होगा |

“इसके प्रसार की दर और इसके उत्परिवर्तन (Mutation) की दर से, हम यह कह सकते हैं कि यह कोरोनावायरस कभी भी समाप्त नहीं होगा। न केवल भारत में, बल्कि विश्व स्तर पर भी। बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के बिना आपके साथ रहने के लिए स्थानिक बन जाएगा, क्योंकि विशाल बहुमत ने सुरक्षात्मक एंटीबॉडी विकसित की होगी।”

जैसा कि भारत SARS-CoV-2 की संभावित तीसरी लहर का सामना करने के लिए तैयार है, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि “भारत कोविड -19 स्थानिकता के उस चरण में प्रवेश कर रहा है, जहां कम और मध्यम स्तर का संचरण है”।

शोध भी मानते हैं कि कोरोना कहीं नहीं गया 

इस साल की शुरुआत में, वैज्ञानिकों ने नेचर जर्नल द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण में संकेत दिया था कि SARS-CoV-2 वायरस स्थानिक होने के लिए तैयार है और वैश्विक आबादी की पॉकेट्स में फैलता रहेगा।

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के पिछले सीरोलॉजिकल सर्वे ने आबादी के एक प्रतिनिधि नमूने से दिखाया था कि 718 में से 70 जिले की लगभग दो तिहाई आबादी में एंटीबॉडी हैं। फिर,उन दो-तिहाई में से कुछ में एंटीबॉडीज हैं।

ab bhi apko corona safety guidelines follow karni zaruri hain
अब भी आपको कोरोना सेफ्टी गाइडलाइंस फॉलो करनी चाहिए। चित्र: शटरस्टॉक

अब धारणा यह है कि अधिकांश लोग जिनके पास एंटीबॉडी हैं, वे संक्रमित हो चुके हैं, लेकिन सभी को बीमारी नहीं हुई है। इसका मतलब है कि बहुमत को बाद में रोगसूचक रोग से बचाया जाएगा। वे संक्रमित हो सकते हैं लेकिन सुरक्षित हैं।

क्लिनिकल एपिडेमियोलॉजिस्ट कर्नल बनर्जी ने भी देशव्यापी सीरो सर्वे का हवाला दिया, जो दर्शाता है कि लगभग 67% भारतीयों में आईजीजी एंटीबॉडीज हैं। “समय के साथ एंटीबॉडी का स्तर कम होता है, तो भी शरीर की स्मृति और टी कोशिकाओं के कारण प्रतिरक्षा बनी रहती है।

हम यह मान सकते हैं कि 67% से अधिक बड़े अनुपात को वायरस का सामना करना पड़ा है। प्राकृतिक संक्रमण के कारण उनमें रोग-प्रतिरोधक क्षमता होती है। आईजीजी स्तरों के लिए और अधिक सीरोसर्वेक्षण की आवश्यकता है।”

क्या टीके की एक अतिरिक्त खुराक मदद कर सकती है ?

टीके की बूस्टर खुराक की आवश्यकता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि औसत व्यक्ति में एंटीबॉडी का स्तर कितनी जल्दी नीचे आता है। “व्यक्तियों के बीच एंटीबॉडी स्तर के घटने की प्रवृत्ति में व्यापक भिन्नताएं हैं। बूस्टर खुराक की आवश्यकता को निश्चित रूप से निर्धारित करने के लिए पर्याप्त डेटा अभी तक नहीं है।

covid - 19 vaccine ki extra dose ke bare me vichar karna hai zaruri
कोविड -19 वैक्सीन की अतिरिक्त डोज पर विचार करना चाहिए। चित्र : शटरस्टॉक

“हालांकि समय के साथ टीके की प्रभावशीलता कम होती दिखाई देती है। फिर भी पर्याप्त सुरक्षा होने की उम्मीद है। यह संभावना है कि भविष्य में एक तीसरा शॉट या बूस्टर आवश्यक हो सकता है और वास्तव में, इन्फ्लूएंजा की तरह एक नियमित बूस्टर शॉट का संकेत दिया जा सकता है।

त्योहारी सीजन में सावधान रहना है जरूरी

स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने लोगों को आगामी त्योहार और शादियों के मौसम के दौरान कोविड-19 के मामले फिर से बढ़ सकते हैं। इसके खतरे के प्रति लोगों को आगाह करते हुए वे कहते हैं, ‘‘कृपया अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर में सतर्क रहें.’’ उन्होंने लोगों को भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने एवं अनावश्यक यात्रा करने से बचने और घर पर रहने, त्योहार डिजिटल माध्यमों से मनाने तथा खरीददारी के ऑनलाइन माध्यमों की संभावना तलाशने की सलाह दी।

अधिकारी ने संयुक्त मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ‘‘हम मौजूदा स्थिति को हल्के में नहीं ले सकते। हमें इस बारे में सतर्क रहना होगा कि महामारी जारी है और यदि हम सावधान नहीं रहे, तो यह खतरनाक रूप ले सकती है।

लव अग्रवाल आगे बताते हैं,’’5 राज्य ऐसे हैं जहां अभी भी 10,000 से ज़्यादा सक्रिय मामले बने हुए हैं। केरल में 1,22,000 के करीब सक्रिय मामले हैं। महाराष्ट्र में 36,000 के करीब सक्रिय मामले हैं। तमिलनाडु, मिज़ोरम और कर्नाटक में भी सक्रिय मामले अधिक संख्या में हैं।

सुरक्षा के लिए त्योहारी सीजन में इन चार बातों का याद रखें

भीड़ भाड़ से जितना संभव हो बचें
मास्क लगाएं
दूरी बना कर रखें
साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें, जैसे दूसरी लहर में रखा था। यानी हाथ धोना, सेनीटाइज करनाा आदि।

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Dr. S.S. Moudgil Dr. S.S. Moudgil

Dr. S.S. Moudgil is senior physician M.B;B.S. FCGP. DTD. Former president Indian Medical Association Haryana State.

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