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Brain Tumor Treatment : अत्याधुनिक उपचार पद्धतियों से दी जा सकती है ब्रेन ट्यूमर को मात

ब्रेन ट्यूमर के सिर्फ दो फीसदी मामले घातक होते हैं। इसका अर्थ यह है कि यदि समय पर ध्यान दिया जाए जो इस गंभीर बीमारी को हराया जा सकता है। यहां हम ऐसी अत्याधुनिक उपचार पद्धतियों के बारे में बता रहे हैं जो भारत में भी उपलब्ध हैं।
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अत्याधुनिक उपचार पद्धतियों ब्रेन ट्यूमर से छुटकारा दिलाने में मदद कर सकती हैं। चित्र : अडोबीस्टॉक
Published: 12 Jun 2024, 03:13 pm IST
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भारत में ऐसी बहुत सारी फिल्में बनी हैं, जिनमें नायक या नायिका को ब्रेन ट्यूमर से जूझते दिखाया जाता है। दुखांत वाली इन फिल्मों ने आम आदमी के मन में यह भय बैठा दिया है कि ब्रेन ट्यूमर का अर्थ जिंदगी का अंत है। जबकि ऐसा नहीं है। मेडिकल साइंस ने आज इतनी तरक्की कर ली है कि ब्रेन ट्यूमर का भी उपचार संभव है। यहां हम ऐसी ही कुछ अत्याधुनिक उपचार पद्धतियों (Advanced treatment for brain tumor) के बारे में बता रहे हैं, जिनकी मदद लेकर ब्रेन ट्यूमर (Brain Tumor Treatment) को मात दी जा सकती है।

ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में असामान्य और तेजी से बढ़ती कोशिकाओं का परिणाम है। जो कैंसरकारक और गैरकैंसरकारक दोनों हो सकती हैं। ब्रेन ट्यमर किसी व्यक्ति का नियमित जीवन प्रभावित कर सकता है। इसमें अक्सर मस्तिष्क संबंधी डिसआर्डर मसलन सिरदर्द, जकड़न और याददाश्त तथा एकाग्रता संबंधी समस्याएं आने लगती हैं। इस वजह से मा​नसिक तनाव भी बढ़ने लगता है और संज्ञानात्मक क्रियाएं बाधित होने लगती हैं। हाल के दिनों में ब्रेन ट्यूमर के उपचार (Brain tumor treatment) के लिए कई तकनीक सामने आई हैं। जिनसे इससे निपटना आसान हुआ है।

टेक्नोलॉजी से निश्चित तौर पर हाल के दिनों में न्यूरोसर्जरी में क्रांति आई है। हाईस्पीड ड्रिल का उपयोग करने से सर्जनों को सटीक पहुंच बिंदु बनाने की अनुमति मिलती है। जिससे ट्यूमर को सुरक्षित और अधिक प्रभावी ढंग से हटाने में सुविधा होती है।

जरूरी है ब्रेन ट्यूमर के बारे में जागरुक होना (Facts about brain Tumor)

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ साइंस के मुताबिक, हाल के वर्षों में ब्रेन ट्यूमर भारतीय आबादी को प्रभावित करने वाले शीर्ष 10 ट्यूमर में से एक बन गया है। माना जाता है कि भारत में प्रत्येक 100,000 लोगों में से 10 को केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ट्यूमर है, जिनमें से लगभग 2 फीसदी घातक हैं। इस तरह के चिंताजनक आंकड़े इस बीमारी और इसके उपचार विकल्पों के बारे में जागरूकता बढ़ाने को महत्वपूर्ण बनाते हैं।

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ब्रेन ट्यूमर एक घातक स्थिति हो सकती है। चित्र : अडोबी स्टॉक

हाल के वर्षों में मेडिकल टेक्नोलॉजी में तरक्की और नवीन उपचार पद्धतियों से भारत में ब्रेन ट्यूमर इलाज के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण क्रांति आई है। इस तरह की तरक्की भारत को न्यूरो-ऑन्कोलॉजी देखभाल के केंद्र के रूप में स्थापित करते हुए रोगी परिणामों में सुधार ला रही है।

क्या हो सकते हैं ब्रेन ट्यूमर के संभावित आधुनिक उपचार (Brain Tumor Treatment)

1 सटीक न्यूरोसर्जरी (Minimal invasive surgery)

भारत में ब्रेन ट्यूमर के इलाज में मिनिमली इनवेसिव सर्जिकल (minimal invasive surgery) तकनीक सबसे आगे है। ये तकनीकें सर्जनों को आसपास के मस्तिष्क के टिश्यू को न्यूनतम क्षति के साथ ट्यूमर तक पहुंचने और हटाने की सुविधाएं देती हैं। जिससे जटिलताओं का खतरा कम हो जाता है और सर्जिकल परिणामों में सुधार होता है।

मिसाल के तौर पर ट्रांसनासल सर्जरी या एंडोस्कोपिक एंडोनासल सर्जरी सर्जनों को पारंपरिक ओपन ब्रेन सर्जरी (Open brain surgery) की जरूरत के बगैर खोपड़ी में मौजूद ट्यूमर तक पहुंच दिलाकर इसे हटाने में मदद करती है। या नाक के अंदर से ही सिर के अंदर का ट्यूमर हटाने में सक्षम बनाती है।

इसमें ट्यूमर तक पहुंचने के लिए नाक के माध्यम से विशेष उपकरण और एक कैमरे की मदद ली जाती है। नतीजतन मरीजों को पारंपरिक तरीकों की तुलना में कम दर्द, तेजी से रिकवरी और कम जोखिम होता है।

सर्जनों को सर्जरी के दौरान ट्यूमर मार्जिन की बेहतर तस्वीर प्राप्त करने में सक्षम बनाते हुए उनकी इंट्राऑपरेटिव नेविगेशन सिस्टम और इमेजिंग सर्जिकल परिशुद्धता बढ़ाती है। जिससे मस्तिष्क के स्वस्थ ऊतकों को संरक्षित करते हुए ज्यादा संपूर्ण स्थिति निर्धारण सुनिश्चित होता है।

यह तकनीक व्यक्तिगत और प्रभावी तरीके से ब्रेन ट्यूमर हटाने में महत्वपूर्ण योगदान करती है।
न्यूरोसर्जरी में अल्ट्रासोनिक एस्पिरेटर भी एक और महत्वपूर्ण प्रगति है। यह उपकरण ट्यूमर के आसपास की स्वस्थ कोशिकाओं को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर ऊतकों को नष्ट करने के लिए अल्ट्रासोनिक तरंगों का उपयोग करता है। इसकी सटीकता और दक्षता इसे ब्रेन ट्यूमर को हटाने, सर्जिकल समय को कम करने और रोगी के परिणाम और रिकवरी को बढ़ाने की नाजुक प्रक्रिया में एक अमूल्य उपकरण बनाती है।

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2 व्यक्तिगत चिकित्सा (Personalize treatment)

व्यक्तिगत चिकित्सा का विकास और बढ़ती स्वीकार्यता ब्रेन ट्यूमर देखभाल में एक बड़ा बदलाव है। ट्यूमर कोशिकाओं की आनुवंशिक और आणविक प्रोफाइलिंग के बाद व्यक्तिगत उपचार योजनाएं बनाई जाती हैं। इस दृष्टिकोण को लक्षित थेरेपी (Targeted Therapy) कहा जाता है जो यह सुनिश्चित करता है कि रोगियों को उनके ट्यूमर की अनूठी विशेषताओं के आधार पर सबसे प्रभावी थेरेपी मिले, उपचार के परिणामों में सुधार हो और अनावश्यक दुष्प्रभाव कम हों।

3 विकसित रेडियोथेरेपी (Advanced radiotherapy)

अनुकूली रेडियोथेरेपी जैसी उन्नत विकिरण चिकित्सा तकनीकें रोगियों को उच्च स्तर का वैयक्तिकरण प्रदान करती हैं। यह विभिन्न रेडियोथेरेपी उपचार तकनीकों में लचीलेपन की सिफारिश करके डॉक्टरों को रोगी की स्थिति के अनुसार निर्देशित वर्कफ़्लो प्रदान करता है।

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ब्रेन ट्यूमर मस्तिष्क में या उसके पास कोशिकाओं की वृद्धि है। ब्रेन ट्यूमर ब्रेन टिश्यू में हो सकता है। चित्र : अडोबी स्टॉक

यह पद्धति उच्चतम सटीकता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करते हुए निश्चित समय पर डाटा आधारित उपचार को लगातार समायोजित और अनुकूलित करने के लिए योजना और उपचार दोनों प्रक्रियाओं के दौरान नैदानिक ​​​​इमेजिंग का लाभ प्रदान करती है।

4 बहुविभागीय देखभाल (Multidisciplinary care)

व्यापक ब्रेन ट्यूमर उपचार के लिए बहु-विभागीय देखभाल टीमों का एकीकरण आवश्यक है। स्वास्थ्य देखभाल के डिजिटलीकरण और दूरस्थ रोगी परामर्श ने भी समग्र देखभाल प्रदान करने के लिए कई विशेषज्ञों के बीच सहयोग को प्रोत्साहित किया है। यह टीम-आधारित दृष्टिकोण यह सुनिश्चित करता है कि निदान और उपचार से लेकर ऑपरेशन के बाद की देखभाल और पुनर्वास तक मरीज की स्थिति के सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाए।

चलते-चलते 

भारत में ब्रेन ट्यूमर देखभाल में अत्याधुनिक तकनीकों और नवाचार उपचार पद्धतियों की प्रगति रोगी के परिणामों और जीवन की गुणवत्ता में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। सटीक निदान और न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी से लेकर उन्नत विकिरण चिकित्सा और व्यक्तिगत चिकित्सा तक भारत न्यूरो-ऑन्कोलॉजी देखभाल में सबसे आगे है। जैसे-जैसे अनुसंधान और प्रौद्योगिकी का विकास जारी है, भारत में ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहे रोगियों के लिए भविष्य अब ज्यादा आशावादी बन गया है।

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लेखक के बारे में

डॉ. अजय चौधरी, प्रोफेसर और प्रमुख, न्यूरोसर्जरी विभाग, ए.बी.वी.आई.एम.एस (अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) और आर.एम.एल. अस्पताल, नई दिल्ली ...और पढ़ें

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