धूम्रपान न करने वालों में भी बढ़ रहे हैं लंग कैंसर के मामले! विशेषज्ञ बता रहे हैं क्यों

Updated on: 20 November 2021, 12:56 pm IST

क्या आप जानते हैं कि धूम्रपान न करने वालों में भी लंग कैंसर के मामले आम हो गए हैं? मगर क्या इन्हें रोका जा सकता है? आइए अब पता करते हैं!

क्या आप जानते हैं कि धूम्रपान न करने वालों में भी लंग कैंसर के मामले आम हो गए हैं? चित्र : शटरस्टॉक

फेफड़े का कैंसर (Lung Cancer) दुनिया में दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। इसे अक्सर धूम्रपान (Smoking) करने वालों में आम माना जाता रहा है। 2020 में नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित 15-20 प्रतिशत पुरुष और 50 प्रतिशत से अधिक महिलाएं धूम्रपान नहीं करती हैं। शोध से पता चलता है कि फेफड़ों के कैंसर और धूम्रपान को लेकर कई तरह की भ्रांतियां न केवल रोगियों को प्रभावित करती है, बल्कि उपचार के दौरान देखभाल करने वाले और डॉक्टरों को भी प्रभावित करती हैं।

क्या हैं नॉन स्मॉकर्स में लंग कैंसर के संभावित कारण

फेफड़ों का कैंसर तंबाकू के अलावा और भी कई कारणों से हो सकता है। यह रोग विभिन्न स्थितियों में विकसित हो सकता है, जो धूम्रपान न करने वालों में इसके जोखिम को बढ़ा सकता है। यहां हम बात कर रहे हैं “धूम्रपान न करने वालों की” जिन्होंने अपने जीवनकाल में 100 से कम सिगरेट पी हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि फेफड़े का कैंसर धूम्रपान न करने वालों को अलग तरह से प्रभावित करता है, और इसके मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

धूम्रपान न करने वालों के लिए फेफड़ों के कैंसर के जोखिम कारक क्या हैं?

1. सेकेंड हैंड स्मोक

सिगरेट, पाइप, सिगार और अन्य तंबाकू उत्पादों के धुएं को अंदर लेना धूम्रपान जितना खतरनाक हो सकता है। धूम्रपान न करने वालों को गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना करना पड़ता है। अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार तंबाकू में हजारों हानिकारक रसायन जैसे निकोटीन, हाइड्रोजन साइनाइड, लेड, अमोनिया, आर्सेनिक, कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य पदार्थ मौजूद हैं। ये तत्व फेफड़ों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते हैं।

लंग डिजीज किसी को भी हो सकती है। चित्र: शटरस्‍टॉक

2. वायु प्रदूषण

प्रदूषित हवा में सांस लेने से फेफड़ों का कैंसर या सांस की अन्य बीमारियां होने की संभावना रहती है। उद्योगों, वाहनों और अन्य विभिन्न स्रोतों से दूषित हवा के लंबे समय तक संपर्क में रहने के नियमित धूम्रपान के समान परिणाम होते हैं।

3. जेनेटिक्स

फेफड़ों का कैंसर विरासत में भी मिल सकता है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि केवल कैंसर कोशिकाएं विरासत में मिली हैं, बीमारी नहीं। इसलिए, यह कैंसर होने की संभावना को निर्धारित नहीं करता है।

4. आयु

फेफड़ों का कैंसर किसी भी उम्र में हो सकता है, लेकिन 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोग अधिक संवेदनशील होते हैं।

5. गैसों के संपर्क में आना

हानिकारक गैसों में सांस लेना जो मिट्टी, हवा, पानी और अन्य माध्यमों से फैल सकती हैं, असुरक्षित हैं और जटिलताएं पैदा कर सकती हैं।

धूम्रपान न करने वालों को भी हो सकता है फेफड़ों का कैंसर। चित्र : शटरस्टॉक

6. हानिकारक यौगिकों के संपर्क में आना

एस्बेस्टस, आर्सेनिक, क्रोमियम और निकल जैसे तत्व जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

7. फेफड़ों के रोग

फेफड़ों के कैंसर के विकास का एक अन्य कारण विकिरण चिकित्सा और कीमोथेरेपी के संपर्क में होना हो सकता है।

इन जोखिम तत्वों के संपर्क में आने से रक्तचाप का स्तर, अस्थमा और अन्य बार-बार होने वाली बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है। जहां धूम्रपान न करने वालों में फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ रहे हैं, वहीं वयस्कों की तुलना में बच्चे इसकी चपेट में अधिक आते हैं।

जब शरीर शुरू में इन हानिकारक पदार्थों को अंदर लेता है, तो वह खुद को ठीक करने की कोशिश करता है। मगर बार-बार एक्सपोजर के साथ, शरीर फेफड़ों की समस्याओं के लक्षण दिखाना शुरू कर देता है, जो बाद में फेफड़ों के कैंसर में बदल सकता है।

लंग कैंसर में चेतावनी के संकेत

सांस की तकलीफ, जिससे फेफड़ों को अपनी पूरी क्षमता से काम करना मुश्किल हो जाता है;
खांसी में खून आना, जिसे डॉक्टर को तुरंत दिखाना चाहिए।
कैंसर जब शरीर में फैलने लगता है, तो हड्डियों, छाती और शरीर के अन्य क्षेत्रों में दर्द होता है।
नियमित कार्य करने के लिए ऊर्जा की कमी और अत्यधिक थकान, भूख में कमी और अचानक वजन कम होना।
उंगलियों, चेहरे या गर्दन में सूजन

प्रदूषण से खुद को बचाएं। चित्र: शटरस्टॉक

क्या फेफड़ों के कैंसर से बचाव के कोई उपाय हैं?

1. धूम्रपान से बचें:

धूम्रपान न करने वालों को सेकेंड-हैंड धूम्रपान से बचने की कोशिश करनी चाहिए। मास्क पहनें, स्मोकिंग जोन में जाने से बचें, उन स्थानों पर जाएं जहां धूम्रपान की अनुमति नहीं है, या अन्य धूम्रपान-मुक्त विकल्पों का प्रयास करें।

2. घर पर हवा की गुणवत्ता की जांच करें:

सुनिश्चित करें कि आप चिमनी से निकलने वाले धुएं, धूल, रसोई के धुएं, पालतू जानवरों के फर, और अगरबत्ती या मोमबत्तियों से निकलने वाले धुएं से दूर रहें। ये सभी इनडोर प्रदूषक हैं और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं।

3. नियमित व्यायाम:

दिन में एक बार सक्रिय रहने और हृदय गति बढ़ाने से फेफड़ों की क्षमता को बनाए रखने में मदद मिलती है, और शरीर के समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। फिट रहने के लिए आप पैदल चलना या अन्य शारीरिक गतिविधियां करना भी ज़रूरी है।

4. संतुलित आहार:

स्वस्थ भोजन स्वस्थ जीवन की कुंजी है। सोडियम और संतृप्त वसा में कम भोजन, सब्जियां और फल रोजाना खाना चाहिए।

5. तंबाकू का सेवन न करें:

यदि आप धूम्रपान नहीं करते हैं तो धूम्रपान शुरू न करें या अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन न करें।

फेफड़ों के कैंसर जोखिम को कम करने के लिए इन टिप्स का पालन करें, लेकिन यदि आप किसी भी लक्षण का अनुभव करते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करने की सिफारिश की जाती है।

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Dr. Vinay Samuel Gaikwad

Dr. Vinay Samuel Gaikwad, Surgical Oncologist, CK Birla Hospital, Gurgaon

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