कोरोना महामारी के बाद अब दुनिया पर मंडरा रहा है काली मौत का खतरा, रूसी डॉक्टर ने दी चेतवानी

ग्लोबल वॉर्मिंग के कारण एक बार फिर से दुनिया भर में गिल्टी वाला प्लेग या ब्लैड डेथ फैलाने वाली मक्खियों की संख्या में इजाफा हो रहा है।
ब्लैक डेथ या बूबोनिक प्लेग दुनिया भर के लिए खतरा है। चित्र: शटरस्टॉक
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ Updated on: 13 October 2021, 12:38 pm IST
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कोरोना महामारी का कहर अभी खत्म नहीं हुआ था कि ‘काली मौत’ का साया सभी के सर पर मंडरा रहा है। जी हां… आपने सही सुना काली मौत यानी ब्लैक डैथ (Black Death)। आपको बता दें कि यह बीमारी कोई नई नहीं है, इसनें पहले भी करोड़ों लोगों कि जानें ली हैं। बीते वर्षों में कुल तीन बार दुनिया इस बीमारी की चपेट में आ चुकी है। जानिए क्या है ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) या गिल्टी वाला प्लेग जो दुनिया भर में काली मौत का डर पैदा कर रहा है।

रूस की एक बड़ी डॉक्टर, डॉ अन्ना पोपोवा ने पूरे विश्व को चेतवानी देते हुए कहा है कि जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण बुबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) वापसी कर सकता है। डॉक्टर का दावा है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक ‘जोखिम’ है।

ब्यूबोनिक प्लेग फैलने की आशंका का कारण 

डॉ अन्ना पोपोवा ने कहा कि ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) के लौटने की आशंका इसलिए ज़्यादा है, क्योंकि दुनिया भर में ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) का स्तर बढ़ता जा रहा है। पिछले वर्ष इसके कुछ मामले रूस, चीन और अमेरिका सहित अफ्रीका में देखने को मिले हैं। डॉक्टर के अनुसार अफ्रीका में इसके फैलने की आशंका सबसे ज़्यादा है।

क्या है ब्लैक डेथ यानी ब्यूबोनिक प्लेग?

बुबोनिक प्लेग एक जीवाणु रोग है, जो जंगली मक्खियों पर रहने वाले पिस्सू द्वारा फैलता है। यदि समय पर इसका इलाज न किया जाए तो यह 24 घंटे से भी कम समय में एक वयस्क को मार सकता है। बुबोनिक प्लेग का मानव-से-मानव संचरण दुर्लभ है और यह आमतौर पर जानवरों से मनुष्यों में आता है। ब्यूबोनिक प्लेग (Bubonic Plague) जिस बैक्टीरिया की वजह से होता है उसका नाम है यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरियम (Yersinia Pestis Bacterium)।

ब्यूबोनिक प्लेग चूहों से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारी है। चित्र: शटरस्टॉक

कैसे करता है शरीर पर हमला

यर्सिनिया पेस्टिस बैक्टीरियम सबसे पहले शरीर की लिंफ नोड्स, खून और फेफड़ों पर हमला करता है। जिसकी वजह से उंगलियां काली पड़कर सड़ने लगती है। इसलिए यह ब्लैक डैथ के नाम से चर्चित है। इसे गिल्टीवाला प्लेग भी कहते हैं, क्योंकि इसमें शरीर में असहनीय दर्द, तेज बुखार होता है और नाड़ी तेज चलने लगती है।

प्लेग से प्रभावित लोग आमतौर पर अन्य लक्षणों के साथ तीव्र ज्वर रोग विकसित करते हैं। इसके अन्य लक्षणों में अचानक तेज़ बुखार आना, ठंड लगना, सिर और शरीर में दर्द और कमजोरी, उल्टी और घबराहट शामिल है।

आखिर क्यों बढ़ रहा है ब्लैक डैथ का खतरा?

डॉ अन्ना पोपोवा का कहना है कि बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण इस बीमारी को फैलाने वाली मक्खियों में इजाफा हो रहा है। जंगली मक्खियों पर रहने वाला पिस्सू सबसे पहले चूहों को संक्रमित करता है और चूहों के मरने के बाद यह इंसान के शरीर में प्रवेश कर सकता है। जिसकी वजह से प्लेग फैलता है।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, मेडागास्कर और पेरू, यह तीन सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देश हैं। मेडागास्कर में, लगभग हर साल सितंबर और अप्रैल के बीच ब्यूबोनिक प्लेग के मामले दर्ज किए जाते हैं।

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लेखक के बारे में
ऐश्‍वर्या कुलश्रेष्‍ठ

प्रकृति में गंभीर और ख्‍यालों में आज़ाद। किताबें पढ़ने और कविता लिखने की शौकीन हूं और जीवन के प्रति सकारात्‍मक दृष्टिकोण रखती हूं।

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