जेएएमए ऑन्कोलॉजी (JAMA Oncology) द्वारा प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार इंसुलिन की हाई डोज कैंसर जैसी गंभीर समस्या को जन्म दे सकती है। स्टडी इंसुलिन की हाई डोज और टाइप 1 डायबिटीज के मरीजो को कैंसर होने की संभावना पर फोकस कर रही है। वहीं हाई ब्लड शुगर लेवल और इंसुलिन का बढ़ता लेवल कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कि टाइप 2 डायबिटीज, किडनी फैलियर, फैटी लिवर, कार्डियो वैस्कुलर डिजीज और कैंसर होने के जोखिम बढ़ा देता है।
स्टडी में बताया गया है कि कैंसर होने की संभावना एज और जेंडर पर भी निर्भर करती है। इंसुलिन की हाई डोज बढ़ती उम्र के साथ कैंसर होने की संभावना को भी बढ़ा देती है। वहीं पुरुषों की तुलना में महिलाओं में कैंसर होने की संभावना कई गुणा ज्यादा नजर आई।
इंसुलिन पैंक्रियाज द्वारा रिलीज किए जाने वाला एक प्रकार का हार्मोन है। जब आप किसी भी खाद्य पदार्थ के माध्यम से शुगर कन्ज्यूम करती हैं, तो यह पैंक्रियाज को इंसुलिन रिलीज करने के लिए ट्रिगर करता है। फिर इंसुलिन शुगर को एनर्जी में कन्वर्ट करके ब्लड सेल्स तक पहुंचाने का काम करती है। इसके साथ ही इंसुलिन शरीर में लिपिड और फैट को ब्रेकडाउन करने और इसे इस्तेमाल करने में मदद करती है।

शरीर में इंसुलिन की मात्रा पूरी तरह आपके शुगर इनटेक पर निर्भर करती है। यदि आप अधिक मात्रा में शुगर लेती हैं, तो पैंक्रियाज ज्यादा मात्रा में इंसुलिन रिलीज करते हैं। वहीं मोटापे से ग्रसित व्यक्ति में इन्सुलिन रेजिस्टेंस होने की संभावना बढ़ जाती है।
ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित रखने के लिए इंसुलिन की हाई डोज लेना इंसुलिन रेजिस्टेंस का कारण बन सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस में मसल्स सेल्स, फैट और लिवर इंसुलिन को रिस्पांस नहीं करते। साथ ही इंसुलिन शुगर और ग्लूकोज को एनर्जी में कन्वर्ट नहीं कर पाता। जिस वजह से ब्लड शुगर लेवल काफी ज्यादा बढ़ सकता है।
इंसुलिन के ओवरडोज से वेस्ट और ऑर्गन्स के पास एक्स्ट्रा फैट जमा होने लगता है। परिणाम स्वरूप वजन बढ़ने, इन्फ्लेमेशन और हार्मोन अवरोध के कारण विभिन्न प्रकार के कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है।

स्टडी में बताया गया है कि इंसुलिन के ओवरडोज से डायबिटीज के मरीजों में कैंसर होने की संभावना ज्यादा होती है। वहीं टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों में ज्यादातर पेट, लिवर, पेनक्रियाज, एंडोमेट्रियम और किडनी कैंसर देखने को मिला।
दूसरी ओर एक स्टडी में बताया गया कि लंबे समय तक इंसुलिन का लेवल बढ़ा रहने से ब्रेस्ट, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। कई और स्टडीज में यह भी सामने आया है कि लाइफ़स्टाइल हैबिट्स में बदलाव लाकर अर्थात स्वस्थ खानपान की आदत, ज्यादा से ज्यादा समय एक्टिव रहना और एक हेल्दी वेट मेंटेन करके इन तीनों प्रकार के कैंसर के जोखिम को कम किया जा सकता है।
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