Somatic Stretching : डेस्क जॉब में हैं, तो आपके लिए फायदेमंद हो सकती है सोमेटिक स्ट्रेचिंग

जब आप अपने शरीर को एक लय और गति के साथ सक्रिय करते हैं, तो यह हर उस हिस्से को एक्टिव और रिलैक्स करती है, जो लगातार एक ही पाेजीशन में रहने के कारण तनावग्रस्त हो गया था।
somatic therapy me man aur shreer donon par kam hota hai.
सोमेटिक थेरेपी या दैहिक मनोचिकित्सा मन और शरीर के संबंध पर आधारित होता है। चित्र : अडोबी स्टॉक
संध्या सिंह Published: 11 Jun 2024, 08:00 am IST
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अगर आप अपनी गर्दन, पीठ के निचले हिस्से या कलाई में बहुत ज़्यादा तनाव महसूस करते हैं, तो आप जरूर एक डेस्क वर्कर हैं। सोमैटिक स्ट्रेचिंग वह अभ्यास हो सकता है जिसकी आपको सबसे ज्यादा जरूरत है। सोमैटिक मूवमेंट में आप अपने शरीर को एक निश्चित तरीके से हिलाने के लिए मजबूर करने के बजाय मूवमेंट के आंतरिक अनुभव और भावना पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

क्या है सोमेटिक स्ट्रेचिंग और ये नॉर्मल स्ट्रेचिंग स कैसे अलग है

सोमेटिक स्ट्रेचिंग बॉडीवर्क का एक रूप है जो कोमल, सचेत मूवमेंट के माध्यम से शरीर के बारे में जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित है। यह पुरानी मांसपेशियों के तनाव को दूर करने, शरीर के एलाइनमेंट में सुधार करने और पूरे मूवमेंट पैटर्न को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। “सोमेटिक” शब्द ग्रीक शब्द “सोमा” से आया है, जिसका अर्थ है “शरीर”, जो आंतरिक शारीरिक धारणा और अनुभव पर अभ्यास के फोकस पर जोर देता है।

सोमेटिक स्ट्रेचिंग न केवल आपकी मांसपेशियों को, बल्कि आपके मस्तिष्क को भी सक्रिय करती है। जब आप बहुत धीरे-धीरे और ध्यानपूर्वक अपनी मांसपेशियों को सिकोड़ना शुरू करते हैं, तो इससे अवेयरनेस आती है। फिर दिमाग सीधे उस स्थान पर चला जाता है जो मस्तिष्क को फिर से प्रोग्राम करने में मदद करता है।

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माइंडफुलनेस और ध्यान लगाने वाले अभ्यास मूड को सकारात्मक रूप से प्रभावित करते हैं और सेरोटोनिन के स्तर को बढ़ाते हैं।

क्या हैं सेहत के लिए सोमेटिक स्ट्रेचिंग के लाभ

सोमेटिक स्ट्रेचिंग मन-शरीर के संबंध को मजबूत करने के लिए डिज़ाइन की गई हैं। जो समग्र स्वास्थ्य और कल्याण को लाभ पहुंचाते हैं। यह भी संभव है कि जो लोग नियमित रूप से सोमौटिक स्ट्रेचिंग का अभ्यास करते हैं, वे अपनी मुद्रा, गति की सीमा, संतुलन और लचीलेपन में सुधार कर सकते हैं।

2020 में पुराने दर्द से पीड़ित लोगों में राहत के लिए एक संभावित उपकरण के रूप में सोमौटिक स्ट्रेचिंग का अध्ययन किया गया। इसमें निष्कर्ष निकला कि इसकी रणनीति आशाजनक है। इस मामले पर और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है।

इन 5 सरल व्यायामों से कर सकते हैं सोमेटिक स्ट्रेचिंग की शुरुआत

1 अपना सिर नीचे झुकाएं

अपने पैरों को ज़मीन पर टिकाकर सीधे खड़े हो जाएं।

धीरे-धीरे अपने सिर को नीचे झुकाएं, उसे आराम से जितना हो सके उतना नीचे जाने दें।

ध्यान दें कि आपकी गर्दन की मांसपेशियां कैसा महसूस करती हैं।

ऐसे क्षेत्र की पहचान करें जो तनावपूर्ण महसूस करता है, जैसे कि आपकी गर्दन का पिछला हिस्सा।

2 सोमेटिक पेल्विक टिल्ट्स

अपने घुटनों को मोड़कर, पैरों को फर्श पर सीधा रखकर पीठ के बल फर्श पर लेट जाएं।

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अपने हाथों को अपने पैल्विक पर रखें ताकि मूवमेंट महसूस हो।

सांस लें और धीरे से अपने पैल्विक को आगे की ओर झुकाएं, जिससे आपकी पीठ के निचले हिस्से में एक छोटा सा आर्च बन जाए।

सांस छोड़ें और अपने पैल्विक को पीछे की ओर झुकाएं, जिससे आपकी पीठ के निचले हिस्से को फर्श पर दबाया जा सके।

अपनी पीठ के निचले हिस्से और पैल्विक में होने वाली संवेदनाओं पर ध्यान देते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ें।

3 सोमेटिक शोल्डर रोल

अपनी रीढ़ को सीधा रखते हुए बैठें या खड़े हों और अपनी भुजाओं को अपने बगल में आराम से रखें।

धीरे-धीरे अपने कंधों को अपने कानों की ओर उठाएं, फिर उन्हें गोलाकार गति में पीछे और नीचे रोल करें।

धीरे-धीरे आगे बढ़ें, अपने कंधों और ऊपरी पीठ में मूवमेंट पर ध्यान दें।

5-10 रोल के बाद दिशा को विपरित कर दें और दोहराएं।

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वृक्षासन सोमेटिक एक्सरसाइज का एक रूप है। चित्र: शटरस्टॉक

4 ट्री पोज

दोनों पैरों पर मजबूती से खड़े हो जाएं।

अपना वजन अपने बाएं पैर पर डालें और अपने दाएं पैर को ज़मीन से ऊपर उठाएं।

अपने दाएं पैर को अपनी बाएं काल्फ या ऊपरी जांघ पर लाएं ।

अपने हाथों को अपने दिल के सामने एक साथ लाएं, अपनी बाहों को ऊपर की ओर फैलाएं या सहारे के लिए दीवार को छुएं।

धीरे-धीरे अपने पैर को छोड़ने से पहले कुछ सांसों तक इसी पोज में रहें।

5 बटरफ्लाई हग

सबसे पहले आराम से बैठें जाएं।

अपने दाहिने हाथ को अपनी बाईं बगल या अपनी बाईं पसलियों के बाहर ले आएं।

अपने बाएं हाथ को अपनी दाहिनी भुजा पर रखें और धीरे से इस स्थिति को पकड़ें।

इस पोज में जितना समय चाहिए उतना समय बिताएं। अगर आपको सहज लगे तो अपनी आंखें बंद कर लें।

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लेखक के बारे में

दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट संध्या सिंह महिलाओं की सेहत, फिटनेस, ब्यूटी और जीवनशैली मुद्दों की अध्येता हैं। विभिन्न विशेषज्ञों और शोध संस्थानों से संपर्क कर वे  शोधपूर्ण-तथ्यात्मक सामग्री पाठकों के लिए मुहैया करवा रहीं हैं। संध्या बॉडी पॉजिटिविटी और महिला अधिकारों की समर्थक हैं। ...और पढ़ें

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