Yoga to balance hormones : अर्ली मेनोपॉज का जोखिम बढ़ा देता है हॉर्मोनल असंतुलन, इन 4 योगासनों की मदद से करें इन्हें संतुलित

डिप्रेशन, एंग्जाइटी, इनसोम्निया, थकान, इनफर्टिलिटी, इरेगुलर पीरियड्स, लो लिबिडो और असामान्य रूप से भूख लगना भी असन्तुलि हॉर्मोन्स के लक्षणों में शामिल हैं। इन्हे बैलेंस करना है तो इन 4 योगाभ्यास की मदद ले सकती हैं।
downward facing dog pose) . चित्र : शटरस्टॉक
अधो मुख श्‍वानासन (शरीर में ब्लड सर्कुलेशन को बढ़ावा देता है। चित्र : शटरस्टॉक
अंजलि कुमारी Published: 19 Jul 2023, 08:00 am IST
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हर महिला को अपने पूरे जीवन काल में कई तरह के शारीरिक एवं स्वास्थ्य उतार-चढ़ाव से गुजरना पड़ता है। ऐसे में हर पड़ाव पर हमारे शरीर को सही से कार्य करने के लिए एक उचित मात्रा में हार्मोन की आवश्यकता होती है। कई बार यह हॉर्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं, जिसकी वजह से स्वास्थ संबंधी विभिन्न प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हार्मोनल असंतुलन की स्थिति में आपको अचानक से वेट गेन या वेट लॉस का सामना करना पड़ सकता है। इसके अलावा डिप्रेशन, एंग्जाइटी, इनसोम्निया, थकान, इनफर्टिलिटी, इरेगुलर पीरियड्स, लो लिबिडो और असामान्य रूप से भूख लगना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं।

हालांकि, लाइफस्टाइल की कुछ आदतों में बदलाव कर और खुद को शारीरिक रूप से सक्रिय रख आप इस समस्या से निजात पा सकते हैं। खासकर हॉर्मोन्स को संतुलित करने में योगासन आपकी बहुत मदद करते हैं। नियमित रूप से कुछ खास योग का अभ्यास आपके हॉर्मोन्स को संतुलित रखते हुए समग्र सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होता है।

हेल्थ शॉट्स ने हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए योगाभ्यासों को लेकर आईएसएसए सर्टिफाइड फिटनेस ट्रेनर और मेटाबॉलिक्स की फाउंडर जूली वागले से बात की। उन्होंने हार्मोनल संतुलन बनाए रखने के लिए कुछ प्रभावी योगासनों के नाम सुझाए हैं (Yoga to balance hormones), तो चलिए जानते हैं इन्हें करने का सही तरीका।

dark spots ka karan hain hormones
हॉर्मोन शरीर में रासायनिक संदेशवाहक होते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपका शरीर ठीक से काम कर रहा है, हार्मोन संतुलन महत्वपूर्ण है। पर जब ये असंतुलित होने लगते हैं तो कई तरह की समस्याएं पैदा कर देते हैं। चित्र : शटरस्टॉक

पहले जानें हॉर्मोन्स को संतुलित करने में कैसे मददगार हो सकते हैं योगासन

1. कुछ ऐसे खास योगाभ्यास है जो समग्र शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं। यह आपके समस्त बॉडी फंक्शन को मेंटेन रखते हैं, जिनमें हार्मोनल बैलेंस भी शामिल है। यह योगाभ्यास संतुलित मात्रा में हॉर्मोन्स के उत्पादन को बढ़ावा देते हैं और जरूरत के अनुसार शरीर में इसका डिस्ट्रीब्यूशन करते हैं।

2. योगाभ्यास के दौरान सांसो की प्रक्रिया एंडोक्राइन सिस्टम को स्टिम्युलेट करने में मदद करती हैं, जिससे कि बॉडी हॉर्मोन्स अधिक प्रभावी रूप से कार्य कर पाते हैं।

3. कई बार अधिक तनाव के कारण भी हॉर्मोन्स असंतुलित हो जाते हैं, ऐसे में योगाभ्यास स्ट्रेस रिलीज करने में आपकी मदद करता है। तमाम साइंटिफिक स्टडी भी इस बात का दावा करते हैं कि योग स्ट्रेस को कम करता है। योगाभ्यास के साथ-साथ प्राणायाम मेडिटेशन इत्यादि भी आपके समग्र बॉडी फंक्शन के लिए फायदेमंद होते हैं।

यहां हैं हॉर्मोन्स को संतुलित रखने के लिए 4 प्रभावी योगासन (Yoga to balance hormones)

1. त्रिकोणासन (Trikonasana)

दोनों पैरों को आराम से अलग करके खड़ी हो जाएं।

दोनों हाथों को अपने दोनों ओर साइड में धीरे-धीरे उठाएं जब तक की वे क्षैतिज न हो जाएं।

फिर सांस छोड़ें और धीरे-धीरे दाहिनी ओर झुकें साथ ही दायें हाथ को दायें पैर के पीछे की ओर रखें।

इस दौरान अपने बाएं हाथ को सीधा ऊपर की ओर रखें।

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अब बायीं हथेली को आगे की ओर मोड़ें।

फिर अपने सिर को नीचे की ओर घुमाएं और बाईं मध्यमा उंगली की नोक पर देखें।

अब श्वास को सामान्य रखें और 10 से 20 सेकेंड तक इस मुद्रा में बनी रहें।

समय पूरा होने पर श्वास लें और ऊपर की ओर आएं। ठीक इसी तरह बाईं ओर से भी इसे दोहरायें।

Trikonasana
बच्चों की हाइट बढ़ा सकता है त्रिकोनासन। चित्र : शटरस्टॉक

2. अधोमुखश्वानासन (downward facing dog)

इस मुद्रा में आने के लिए सबसे पहले अपनी हथेली एवं घुटनों के बल टेबल टॉप स्थिति में आ जाएं।

फिर धीरे-धीरे कमर को ऊपर की तरफ उठाएं। इस दौरान अपनी कोहनी और घुटनों को सतह पर मजबूती से टिकाए रखें।

अपने हिप्स को उठाएं और देखें कि आपके शरीर से उल्टा “v” आकार बन रहा हो।

अब हथेलियों को नीचे जमीन की सतह पर दबाएं और गर्दन को स्ट्रेच करें।

कुछ सेकंड तक इस मुद्रा में बनी रहें और फिर घुटनों को जमीन पर रिलैक्स करते हुए सामान्य स्थिति में वापस आ जाएं।

3. बालासन (child pose)

इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले वज्रासन की मुद्रा में बैठें।

इस दौरान रीढ़ की हड्डी को बिल्कुल सीधी रखना है।

अब गहरी सांस लें और दोनों हाथों को ऊपर की ओर सीधा उठाएं।

सांस छोड़ें और कमर के ऊपरी भाग यानी कि अपने घर को आगे की ओर झुकाएं।

पूरी तरह झुकना है देखें कि सिर सतह से सटा हो।

फिर दोनों हाथों को आगे की ओर झुकाएं और इन्हें बिल्कुल सीधा स्ट्रेच करें।

इस मुद्रा में कुछ सेकंड तक बनी रहें। फिर धीरे-धीरे सामान्य मुद्रा में वापस आ जाएं।

परिणाम के लिए इस प्रक्रिया को कम से कम 5 से 6 बार जरूर दोहराएं।

Bhujangasan
कोबरा पोज़ इस परेशानी को कम करने में मददगार है। चित्र: शटरस्टॉक

4. भुजंगासन (cobra pose)

इस मुद्रा में आने के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं।

अब कंधों और हथेलियों को अपनी जगह पर रखें और गहरी सांस लें।

फिर सिर, छाती और पेट यानी कि अपने ऊपर इधर को ऊपर की ओर उठाएं।

इस दौरान सीधा ऊपर की ओर देखें और अपने हाथों से सतह पर मजबूत पकड़ बनाए रखें।

पेट और पैर की उंगलियों को फर्श की ओर दबाएं।

ऊपर जाते समय सांस लें और नीचे आते समय सांस छोड़ें।

उचित परिणाम के लिए इस प्रक्रिया को कम से कम 7 से 8 बार जरूर दोहराएं।

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इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म ग्रेजुएट अंजलि फूड, ब्यूटी, हेल्थ और वेलनेस पर लगातार लिख रहीं हैं। ...और पढ़ें

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