मेटाबॉलिज़्म हुआ कमजोर, तो 40 के बाद तेजी से बढ़ने लगेगा वज़न, जानिए कैसे करना है कंट्रोल

Updated on: 30 May 2022, 19:05 pm IST

चालीस के बाद शरीर में इन्सुलिन रेसिस्टेंस बढ़ जाता है और मेटाबॉलिज्म रेट घटने लगता है। जिससे आपके लिए वेट लॉस करना जटिल हो सकता है।

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40 के बाद मेटाबॉलिज्म रेट हौर इन्सुलिन रेसिस्टेंस बढ़ जाती है

क्या मिडल एज तक पहुंचते आपको ऐसा लग रहा है कि वजन कम करना कठिन होता जा रहा है? तो इसके लिए आपका कमजोर पाचन यानी चयापचय (Metabolism) जिम्मेदार हो सकता है। असल में उम्र बढ़ने के साथ, मेटाबॉलिज्म रेट धीमा हो जाता है। हम हर साल लगभग 0.5 प्रतिशत मांसपेशियों को खोना शुरू कर देते हैं और यह लिक्विड कैलोरी जलाने के लिए जिम्मेदार है। लेकिन चिंता न करें हम आपको बताएंगे कि चालीस की उम्र के बाद भी आप किस तरह अपने मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ा कर अपना वजन कम कर सकती हैं।

पहले समझिए मेटाबॉलिज्म क्या है?

मेटाबॉलिज्म एक रासायनिक प्रक्रिया है, जिसमें शरीर खाने को ऊर्जा में परिवर्तित करता है। एक व्यक्ति के शरीर को बुनियादी कार्यों को करने के लिए जितनी कैलोरी की आवश्यकता होती है, उसे बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) कहा जाता है। ऐसे कई कारक हैं जो बीएमआर को प्रभावित कर सकते हैं, जिनमें शरीर का आकार और संरचना (अधिक मांसपेशियों वाले लोग अधिक कैलोरी जलाते हैं), जेंडर (पुरुषों के शरीर में फैट कम और मांसपेशियां अधिक होती हैं), और उम्र (मांसपेशियों का उम्र के साथ कम हो जाता है) शामिल हैं। वजन बढ़ना आपके द्वारा जलाए जाने से अधिक कैलोरी लेने का परिणाम है।

एक्सरसाइज करना है मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त करने के लिए जरूरी

नियमित व्यायाम करना आपकी चर्बी कम करेगा, आपकी मांसपेशियों को बढ़ाएगा और ऊर्जा को बढ़ाने में मदद करेगा। इसके साथ ही यह कम समय में बेहतर रिजल्ट दे सकता है। इसके अलावा आप चालीस की उम्र के बाद अपने वेट को मैनेज करने के लिए मेटाबॉलिज़्म को कैसे बूस्ट कर सकती हैं, इस बारे में हमने बात की जामनगर के स्टे हेल्दी हेल्थ क्लिनिकल में डाइटिशियन अनिता जेना से।

यहां हैं 40 के बाद भी मेटाबॉलिज्म बूस्ट करने के 7 आसान तरीके

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बैलेंस डाइट आपके मेटाबॉलिज्म रेट को बढ़ा सकती है

1 बॉडी टाइप के हिसाब से रखें कैलोरी काउंट

उम्र बढ़ने के साथ जैसे-जैसे आपकी बॉडी का बीएम घटता है, एनर्जी के लिए कम कैलोरी का इस्तेमाल करने की आवश्यकता होती है। लेकिन बहुत कम खाना खाने से आपके शरीर को इसके दुष्परिणाम भी झेलने पड़ सकते हैं। यदि आप आहार में कमी करते हैं और अपने डेली कैलोरी इंटेक में भारी कटौती करती हैं, तो यह बीएमआर को धीमा कर देंगे।

वजन कम करने पर मेटाबॉलिज्म रेट थोड़ा धीमा हो जाता है। क्रैश डाइट से वजन कम हो सकता है, लेकिन यह आमतौर पर अस्थायी होता है। कम कैलोरी के सेवन से वजन बढ़ता भी उतनी ही तेजी से है। इस बारे में सटीक जानकारी के लिए अपनी डाइटीशियन से बात करें जो आपकी बॉडी टाइप को देखते हुए आपको सही कैलोरी काउंट लेने के लिए कहेंगी

2 प्रोटीन को बनाएं डेली डाइट का हिस्सा

प्रोटीन मांसपेशियों के लिए बेहद ज़रूरी है, इसलिए हर मील में लगभग 20 ग्राम के बराबर विभिन्न प्रकार के प्रोटीन स्रोतों का सेवन ज़रूर करना चाहिए। डाइजेस्टिव सिस्टम प्रोटीन को कार्बोहाइड्रेट या फैट पचाने की तुलना में अधिक कैलोरी का इस्तेमाल करता है। स्किम्ड मीट के साथ, अपने आहार में फलियां और अनाज, जैसे बीन्स, दाल, शतावरी, क्विनोआ जैसे अनाज शामिल करें। प्रोटीन से भरपूर नाश्ता करें जैसे कि उबले अंडे या ग्रीक योगर्ट।

3 कैफीन की जगह लें ग्रीन टी

अगर आपको चाय पीने की आदत है, तो चालीस की उम्र में इसे ग्रीन टी से रिप्लेस करें। इसमें कैफीन की मात्रा होने से मेटाबॉलिज्म भी बूस्ट होता है। इसमें कैटेचिन का एक समृद्ध स्रोत है, जो एंटीऑक्सिडेंट है। यह शरीर की चर्बी को कम कर सकता है। यदि आप दिन भर में कई कप कॉफी पीते हैं, तो दोपहर में एक कप ग्रीन टी पीने की कोशिश करें।

रोजाना पांच से आठ औंस कप ग्रीन टी पीने से प्रतिदिन 100 कैलोरी तक कैलोरी बर्न हो सकती है। जब हर हफ्ते तीन घंटे के मीडियम स्ट्रेंथ एक्सरसाइज़ के साथ, आप ग्रीन टी लेती हैं, तो आप पेट की चर्बी को भी कम कर सकती है।

4 छोटे पोर्शन साइज़ में कई बार खाएं

तीन बार ढेर सारा खाना खाने की बजाय पूरे दिन में कई बार छोटे-छोटे पोर्शन साइज़ में खाना आपके मेटाबॉलिज्म रेट को दुरुस्त रखने में मदद करेगा। हर चार घंटे में स्मॉल पोर्शन में खाने की कोशिश करें और खाने में वेरिएशन एड करें। यदि आप बिना खाए लंबे समय तक चलते हैं, तो आपको ज़्यादा भूख लगने का जोखिम रहता है और आप ओवर ईटिंग कर सकती हैं।

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पास्ता में डाली गई चिली फ्लेक्स भी आपके वेट मैनेजमेंट में करेगी मदद। चित्र : शटरस्टॉक

5 कार्बोहाइड्रेट से न डरें

डायटिशियंस अक्सर आपसे अपनी डाइट से कार्ब्स हटाने के लिए कहते हैं। ताकि आपका वेट सही तरीके से मैनेज हो सके। यहां समझना ज़रूरी है कि आपके शरीर के लिए अच्छे कार्ब्स की बहुत ज़रुरत होती है। ताकि आपकी बॉडी सही तरीके से काम कर सके। वहीं बुरे कार्ब्स को घटाने की आवश्यकता पड़ती है, जिससे आपका वेट मैनेज हो।

सफेद ब्रेड और पास्ता जैसी चीज़ें आपके भोजन में इंसुलिन की वृद्धि कर सकते हैं, जो आपके खाने में फैट की मात्रा को बढ़ाता है और मेटाबॉलिज्म दर को कम करता है। मगर अच्छे कार्बोहाइड्रेट, जैसे साबुत अनाज, स्टार्च वाली सब्जियां और फल, हेल्दी डाइट का एक महत्वपूर्ण, फाइबर युक्त हिस्सा हैं।

यदि आप पास्ता खाना चाहती हैं, तो होल ग्रेन पास्ता चुनें, जो आपके मेटाबॉलिज्म रेट को बनाए रखे। साबुत अनाज शरीर को अतिरिक्त फैट कम करने में मदद कर सकते हैं क्योंकि उन्हें प्रॉसेस किए हुए कार्बोहाइड्रेट को पचाने की तुलना में अधिक एनर्जी की आवश्यकता होती है।आपके मील में कार्बोहाइड्रेट को स्किप करना आपके डाइट का बैलेंस बिगाड़ सकता है।

6 एल्कोहल को करें सीमित

एक पेग एल्कोहल में कुछ भी गलत नहीं है, बल्कि एक छोटा पेग आपकी मेटाबॉलिज्म दर को बढ़ा सकता है। लेकिन दो या दो से अधिक कॉकटेल होने पर बॉडी एनर्जी के लिए अल्कोहल का उपयोग करने लगती है, जिससे आपके शरीर में फैट के जलने की क्षमता कम हो जाती है।

7 सोना है ज़रूरी

हम जानते हैं कि आप बहुत बिजी हैं, पर अगर वेट लॉस करना चाहती हैं, तो अपने नींद का पैटर्न दुरूस्त करना होगा। असल में आपकी नींद अगर पूरी न हो तो मेटाबॉलिज्म रेट स्थिर नहीं रह पाता। अनियमित नींद पैटर्न और नींद की कमी बॉडी में एनर्जी और भूख को नियंत्रित करने में मदद करने वाले हार्मोन के काम को बाधित कर सकती है।

एक अध्ययन से पता चला है कि जो वयस्क नौ घंटे सोते हैं, उनमें मीठे और नमकीन स्नैक्स खाने की इच्छा और भूख कम होती है। इतना ही नहीं मात्र चार घंटे तक सोने वालों की तुलना में उनमें हेल्दी मेटाबॉलिज्म रेट अधिक होता है।

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शालिनी पाण्डेय शालिनी पाण्डेय

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