यहां कुछ योगासन दिए गए हैं, जो आपके लिए सांस लेना आसान बना सकते हैं

Published on: 3 May 2022, 21:03 pm IST

जिन लोगों को किसी भी तरह की ब्रीदिंग प्रोब्लम है, उन्हें योग और प्राणायाम को अपने रुटीन में शामिल करना चाहिए। ये प्राकृतिक तरीके से आपके फेफड़ों की कार्य क्षमता बढ़ा सकते हैं।

yoga dur karega sans lene ki dikkat
अस्थमा से उबरने के लिए आजमाएं ये योगासन। चित्र : शटरस्टॉक

अस्थमा जैसी सांस लेने संबंधी समस्या को दूर करने में योग आसन और श्वास तकनीक एक शक्तिशाली व प्रभावशाली तरीका है। योग का मुख्य उद्दश्यों में से एक ये भी है कि यह मन और शरीर दोनों से तनाव को खत्म करने में मदद करता है। चिंता और तनाव जैसे तमाम कारक मुख्य रूप से सांस फूलने की समस्या का कारण हैं। और नियमित योग अभ्यास करके हम आसानी से अपनी इस समस्या से राहत, फेफड़ों की कार्यक्षमता और स्वास्थ्य को बेहतर कर सकते हैं। आइए जानते हैं उन योगासनों के बारे में जो आपके फेफड़ों के स्वास्थ्य को बूस्ट कर सकते हैं।

आप भी इन योग मुद्राओं और प्राणायाम या सांस संबंधित तकलीफों में राहत दिलाने वाले एक्सरसाइज को दिन में दो बार अपनाकर अपने फेफड़ों को मजबूत बना सकती हैं साथ ही अस्थमा और सांस की अन्य बीमारियों में राहत पा सकती हैं।

यह भी पढ़ें :- इन 5 योगासनों की मदद से अपनी पीठ के निचले हिस्से के दर्द को कम करें

इन स्थितियों में मुश्किल हो जाता है ठीक तरह से सांस लेना

अस्थमा के दौरान समस्या को और बढ़ाने वाले कुछ पर्यावरणीय कारक और लाइफस्टाइल यहां शामिल हैं।
घातक वायु प्रदूषण जो हवा की क्वालिटी बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार होते हैं
सिगरेट पीना
औद्योगिक धूल
ठंडी हवा
फूलों से निकलने वाले परागकण और अन्य एलर्जी फैलाने वाले कण उन लोगों के लिए सांस लेना मुश्किल बना सकते हैं, जो पहले ही अस्थमा या ब्रोंकाइटिस जैसी समस्या से जूझ रहे हैं। ये स्थिति बच्चों के लिए और भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है। क्योंकि उनकी श्वास नली वयस्कों की तुलना में काफी छोटी होती है।

यह भी पढ़ें :- प्रसवपूर्व योग 101: क्या आपको गर्भावस्था के दौरान करना चाहिए इनवर्जन योग?

अस्थमा से जूझ रहे मरीजों को राहत कैसे मिले उस पर हेल्थ शॉट्स की टीम ने योग एवं आध्यात्मिक गुरु और लाइफस्टाइल कोच ग्रैंड मास्टर अक्षर से बात की। बातचीत के दौरान लाइफस्टाइल कोच अक्षर ने कई प्रभावी योग आसनों के बारे में बताया है। इन आसनों के अभ्यास से अस्थमा के दौरान होने वाली तकलीफों से आप आराम पा सकती हैं।

फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए अहम है योग

योग करने से फेफड़ों की कई समस्याएं दूर हो जाती हैं। दरअसल यह अस्थमा के दौरान होने वाली समस्याओं से राहत व तकलीफों को कम करने में मददगार हैं। अस्थमा के लक्षणों को कम करने में योग मददगार साबित होता है। इसलिए इस बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए योग का अभ्यास जरुर करना चाहिए। यह उन्हें काफी फायदा पहुंचाता है।

लाइफस्टाइल कोच अक्षर बताते हैं कि सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए अपनी दिनचर्या में बद्ध कोणासन, हलासन, जानू सिरसासन जैसी मुद्राओं का अभ्यास करना चाहिए। इनके आलावा चाहे तो भस्त्रिका प्राणायाम, अनुलोम विलोम प्राणायाम, खंड प्राणायाम और कपाल भाति को भी दैनिक अभ्यास में शामिल कर सकती हैं।

यह भी पढ़ें :- बार-बार उंगलियां सोशल मीडिया स्क्रॉल करने लगती हैं? तो जानिए इस लत से निजात पाने के उपाय

नियमित योगाभ्यास से अस्थमा मरीजों को मिलते हैं ये लाभ

योग का अभ्यास करने से अस्थमा मरीजों के फेफड़ों की ऑक्सीजन क्षमता बढ़ती है।
यह अस्थमा मरीजों के वायुमार्ग और नाक के मार्ग को दुरुस्त करता है।
अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसी अन्य श्वसन संबंधी बीमारियों को ठीक करने में मदद करता है। साथ ही इन बीमारियों से हुए फेफड़ों के नुकसान को सही करने में सहायक होता है।
यह श्वसन संबंधी बीमारियों की ठीक करने में तेजी और उन समस्याओं की चपेट में आने से बचाव करता है।

corona ke dauran exercise
योग करने का सबसे अच्छा समय सुबह का है। चित्र : शटरस्टॉक

इनका अभ्यास खाली पेट करना चाहिए और इसे करने का सही समय सुबह की शुरुआत है।

योग थेरेपी से पहले सिद्ध वॉक करना है जरुरी

आप योग आसन व श्वास संबंधी एक्सरसाइज की शुरूआत करने से पहले सिद्ध वॉक कर सकती हैं। इसे अन्य नाम जैसे इन्फिनिटी वॉक, योगा वॉक और माइंड वॉक से भी जाना जाता है। योग मास्टर अक्षर बताते हैं कि सिद्ध वॉक एक प्राचीन योगाभ्यास है जो आपके मन, शरीर और आत्मा को असंख्य फायदा पहुंचाती है।
आपको इसके लिए अक्षर 8 की आकृति में दक्षिण से उत्तर दिशा की ओर चलना होगा और फिर अगले चक्कर के लिए दिशा बदलनी होगी। दोनों दिशाओं में तकरीबन 21 मिनट इसे जरुर करना चाहिए।

अस्थमा से जूझ रहे मरीजो को ये चार योगासन पहुचांएगे लाभ

अपने चिकित्सक से सलाह लेने के बाद इन चार आसनों का अभ्यास किया जा सकता है। साथ ही जब भी इन अभ्यासों की प्रैक्टिस की शुरुआत करें, तो इस बात खास ख्याल रखें कि आप एक प्रशिक्षित योग टीचर की निगरानी में यह योग आसन कर रही हैं।

यह भी पढ़ें :- Yoga for hair growth : मजबूत, घने और लंबे बालों के लिए अपने फिटनेस रुटीन में शामिल करें ये 5 योगासन

Boat pose ya naukasan asthma ke liye sabse aham hai
नौकासन अस्थमा के लिए सबसे अच्छे योगासन में से एक है। चित्र: शटरस्टॉक

1. नौकासन या नाव मुद्रा

इस योग आसन में अपने पैरों को आगे की ओर फैलाकर अपनी चटाई पर बैठ जाएं और अपनी पीठ को सीधा रखें। फिर सांस भरते हुए दोनों पैरों को 30 से 45 डिग्री के एंगल पर ऊपर उठाकर कुछ देर रोकें। इस दौरान अपने पीठ को सीधा रखें और बैठने की मुद्रा में हिप बोन पर संतुलन बनाएं रखें।

sukhasana se kafi fayde hote hn
सुखासन करने से अस्थमा में काफी फायदा होता है। चित्र : शटरस्टॉक

2. सुखासन

अपनी पीठ को सीधा रखते हुए एक पैरों को क्रॉस की स्थिति में रखकर बैठ जाएं । अब सामान्य रूप से सांस अंदर लें और बाहर छोड़ें। अपनी आँखों बंद कर लें। और दोनों हाथों को अपने दोनों घुटनों पर ले जाकर रखें।

cobra pose sehat ke lihaj se kafi faydemand hai
अस्थमा से उबरने में सर्पासन काफी मददगार होता है । चित्र: शटरस्टॉक

3. सर्प आसन या कोबरा मुद्रा

सर्प आसन के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं और हाथों को पीठ की ओर ले जाकर उंगलियों को गूंथ लें। औऱ जैसे ही आप सांस अंदर की ओर लेती हैं, अपने सिर, छाती और कंधों को जितना संभव हो सके ऊपर की ओर उठाएं। अपने आपस में गूथे उंगलियों यानी दोनों हाथों को पीछे की ओर फैलाएं। इस दौरान अपने पैरों को फर्श से उठने न दें।

यह भी पढ़ें :- क्‍या योग और व्‍यायाम से आंखों की रोशनी बेहतर होती है? एक्सपर्ट दे रही हैं सबसे ज्यादा पूछे जाने वाले इस सवाल का जवाब

asthma me Locust pose kafi faydemand hai
शलभासन का अभ्यास करने से अस्थमा के मरीजों को राहत मिलती है। चित्र:शटरस्टॉक

4. शलभासन

अपने कंधों की सीध में, हथेलियों को ठीक सपाट नीचे रखकर पेट के बल लेट जाएं। इस दौरान पैरों को एक साथ सीध में रखें। सांस अंदर की ओर लेते समय अपने दाहिने हाथ और बाएं पैर को अपने घुटने को सीधा रखते हुए ऊपर उठाएं। साथ ही अपने सिर और छाती को भी ऊपर उठाना चाहिए। अब धीरे-धीरे कर सांस छोड़ें और यही प्रक्रिया दूसरी तरफ से दोहराएं। याद रहे इस मुद्रा में 10 से 15 सेकंड तक खुद को रोके।

यदि आप पहली बार योग आसन कर रही हैं , तो आपके लिए सलाह है कि इन आसनों के साथ अपने सांस लेने और बाहर निकालने की प्रक्रिया को धीरे-धीरे कर योग के सभी मुद्राओं का अभ्यास भी आराम से करें। इन योग आसनों के साथ आप अपनी दिनचर्या में पांच मिनट के लिए प्राणायाम को भी शामिल कर सकती हैं और धीरे-धीरे कर इसके अवधि को बढ़ा भी सकती हैं। इन सभी योग आसनों के दौरान आने वाले वाली मुद्राओं में 10-15 सेकंड के लिए खुद को रोक कर रख पाने का प्रयास करें और इन योग अभ्यास को 2 से 3 बार दोहराएं।

यह भी पढ़ें :- इन 6 योगासनों का नियमित अभ्यास, आपकी त्वचा को दे सकता है कुदरती निखार

टीम हेल्‍थ शॉट्स टीम हेल्‍थ शॉट्स

ये हेल्‍थ शॉट्स के विविध लेखकों का समूह हैं, जो आपकी सेहत, सौंदर्य और तंदुरुस्ती के लिए हर बार कुछ खास लेकर आते हैं।

स्वास्थ्य राशिफल

ज्योतिष विशेषज्ञ से जानिए क्या कहते हैं आपकी
सेहत के सितारे

यहाँ पढ़ें