एसिडिटी और गैस की समस्या से तुरंत छुटकारा दिलाएंगे ये 6 योगासन

Published on: 4 August 2022, 08:00 am IST

एसिडिटी और गैस शायद सुनने में छोटी समस्या लगें, लेकिन इनमें होने वाली तकलीफ वही समझ सकता है, जो इस समस्या से पीड़ित हो। ये योगासन अपना कर दूर करें ये समस्याएं।

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गैस और एसिडिटी के लिए आजमाएं ये योग चित्र: शटरस्टॉक

वैसे तो एसिडिटी की परेशानी बहुत ही आम है लेकिन इसकी वजह से कई बार समस्या इतनी अधिक बढ़ जाती है कि घरेलू उपाय भी अपना असर दिखाने में काफी समय लगा देते हैं। गैस और एसिडिटी की सबसे बड़ी वजहें तीखा, मसालेदार और बहुत अधिक मीठी चीज़ों का सेवन होता है। इसके अतिरिक्त स्मोकिंग, चाय-कॉफी भी इस परेशानी को अधिक बढ़ा सकते हैं, तो यदि आप इस समस्या से बहुत अधिक परेशान है तो कुछ सरल योग आसनों को अपने रूटीन का हिस्सा बनाएं।

योग एसिडिटी में कैसे लाभदायक है

एसिडिटी और गैस की परेशानी में सुधार करने के लिए योग काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। NCBI (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक मेडिकल शोध में स्पष्ट बताया गया है कि ध्यान और योग करने से पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियों को कम किया जा सकता है, जिसमें एसिडिटी और गैस की समस्या भी शामिल हैं।

वहीं, एक अन्य रिसर्च के अनुसार, योग का अभ्यास पाचन संबंधित कई परेशानियों और उनके लक्षणों को रोकने में लाभकारी हो सकता है। गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लक्स रोग (GERD) उनमें से एक है, जिसमें पेट में गैस के साथ ही एसिडिटी की परेशानी भी हो सकती है। रिसर्च में बताया गया है कि कपालभाती और अग्निसार क्रिया के नियमित अभ्यास से GERD के रोगियों के गंभीर लक्षणों में सुधार हो सकता है। इस आधार पर यह माना जा सकता है कि गैस और एसिडिटी के लिए योग लाभदायक हाे सकता है।

एसिडिटी और गैस को चुटकियों में दूर करने के लिए अपनाएं ये योगासन

अर्धमत्स्येन्द्रासन

अर्धमत्स्येन्द्रासन आसन को करते समय पेट पर दबाब पड़ता है जिससे उस जगह ब्लड का सर्कुलेशन अधिक होता है, पाचन तंत्र को भरपूर मात्रा में ऑक्सीजन मिलता है। एसिडिटी की प्रॉब्लम दूर होती है इसके साथ ही शरीर से गंदगी भी बाहर निकलती है।

इस तरह करें योगासन-

  • जमीन पर बैठें।
  • अब दोनों पैरों को आगे फैलाएं।
  • बायां पांव इस प्रकार मोड़ें कि एड़ी कूल्हे के किनारे से स्पर्श कर रही हो।
  • दायां पैर जमीन पर बाएं घुटने के निकट रखें।
  • बाईं बांह को दाएं घुटने के ऊपर रखें तथा दाएं पैर के पंजे को बाएं हाथ से पकड़ लें।
  • दाईं बांह को कमर की ओर से ले जाकर पीठ के पीछे ले जाएं और पीछे से नाभि स्पर्श करने का प्रयास करें।
  • अपना सिर दाईं ओर घुमाएं और पीछे की ओर देखने का प्रयास करें।
  • जब पीछे देखते हैं तो सांस छोड़ते हुए देखें।
  • अपने हिसाब से आसन को बनाएं रखें।
  • यह आधा चक्र हुआ।
  • इसी क्रिया को दूसरी तरफ से दोहराएं।
  • अब एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से तीन से पांच चक्र करें।

वज्रासन

वज्रासन एक ऐसा आसन है जिसे भोजन के तुरंत बाद करने पर भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती बल्कि यह भोजन को पचाने में मदद करता है इसके साथ ही गैस और एसिडिटी की संभावनाओं को भी काफी कम करता है।योग से जुड़ी एक रिसर्च में यह साफतौर पर निकल कर सामने आया है कि वज्रासन योग करने से पाचन संबंधी समस्याओं को दूर करने में सहायता मिल सकती है। रिसर्च में बताया गया है कि यह ब्लड फ्लो को बढ़ा सकता है, जिससे कब्ज, एसिडिटी, पाइल्स, आंतों की गैस आदि में फायदा मिल सकता है। इस तरह एसिडिटी और गैस के लिए योग में वज्रासन की गिनती की जा सकती है।

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वज्रासन का नियमित अभ्यास करें। चित्र : शटरस्टॉक

इस तरह करें योगासन-

  • सबसे पहले मैट बिछाएं और घुटनों के बल बैठ जाएं।
  • ध्यान रहे कि दोनों पैरों के अंगूठों को साथ मिला लें। एड़ियों को अलग ही रखें।
  • अब नितंबों को एड़ियों पर टिकाएं और हथेलियां को घुटनों पर रख दें।
  • सिर और पीठ को बिल्कुल सीधा रखें।
  • घुटनों को आपस में मिलाऐं।
  • इसके बाद आंखों को बंद करें व सामान्य रूप से सांस लेना जारी रखें।
  • कम से कम दस मिनट तक इस अवस्था में बैठने का प्रयास करें।
  • यदि वज्रासन करते समय घुटनों में दर्द हो रहा हो तो जबरदस्ती इस आसन को न करें।
  • रोजाना एक से दो मिनट इस अवस्था में बैठने का प्रयास करें और धीरे-धीरे इसे करने का समय बढ़ाते रहें।

अधोमुखश्वानासन

अधोमुखश्वानासन आसन भी गैस और एसिडिटी की परेशानी को दूर करने में कारगर है। इस आसन को करते समय शरीर का पूरा वजन हाथों और पैरों पर होता है। पेट को आवश्यक मात्रा में ऑक्सीजन की सप्लाई होती है जिससे एसिडिटी के कारण होने वाली जलन से छुटकारा मिल जाता है।

इस तरह करें योगासन – 

आपने दोनों हाथो और घुटनों पर खड़े हो जाएं, जिससे आपका शरीर एक घोड़े जैसा दिखेगा ।
सांस को छोड़ते हुए कूल्हों को ऊपर की ओर उठाएं और अपनी कोहनी और घुटनों को सीधा रखें। आपको यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि शरीर उलटा “V” की समान बनता है ।
जितना संभव हो उतना हाथों और पैरों को सीधा रखें और सिर सीधा, नज़र नीचे की ओर रखें।
अपनी हथेलियों को जमीन पर सीधा और कंधो से दूर रखें , पैरों को हथेलियों के समानांतर रखें।
गहरी सांस ले और कुछ सेकंड के लिए इस स्थिति में ही रहें, फिर अपने घुटनों को मोड़ें और घोड़े की स्थिति में वापस आएं।

हलासन

एसिडिटी और गैस के लिए योग की लिस्ट में हलासन को शामिल किया जा सकता है। इस आसन को करते हुए शरीर हल की तरह दिखाई देता है, जिस वजह से इसे हलासन के नाम से जाना जाता है। NCBI द्वारा प्रकाशित एक रिसर्च में हलासन को कब्ज, अपच व अन्य पाचन संबंधित परेशानियों के लिए फायदेमंद माना गया है। इस आधार पर माना जा सकता है कि नियमित रूप से हलासन का अभ्यास एसिडिटी और गैस की समस्या से राहत प्रदान कर सकता है।

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नियमित रूप से हलासन करने पर हो जाती है पेट की चर्बी कम। चित्र:शटरस्टॉक

इस तरह करें योगासन –

  • सबसे पहले समतल जगह पर एक योग मैट बिछा लें।
  • अब मैट पर पीठ के बल लेट जाएं।
  • हाथों को शरीर से सटाकर रखना है और हथेलियों को जमीन की ओर रखें।
  • इसके बाद सांस लेते हुए अपने पैरों को ऊपर लेकर जाएं और 90 डिग्री का कोण बनाएं।
  • यदि पैरों को उठाने में परेशानी हो, तो हाथ से कमर को सहारा दे सकते हैं।
  • फिर धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए पैरों की उंगलियों को जमीन से स्पर्श कराने का प्रयास करें।
  • अब हाथों को कमर से हटाकर जमीन पर पहले की तरह ही सीधा रख लें।
  • इस मुद्रा में सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
  • इसके बाद आराम आराम से वापस सामान्य मुद्रा में आ जाएं।
  • इस योगासन को आप अपनी क्षमता के अनुसार तीन से पांच बार कर सकते हैं।

बालासन

बालासन के अभ्यास से भी एसिडिटी की परेशानी दूर होती है। बालासन आसन से पेट के अंदरूनी अंगों की अच्छे से मालिश होती है जिससे सभी अंग सही तरीके से अपना काम कर पाते हैं।

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बालासन के अभ्यास से भी एसिडिटी की परेशानी दूर होती है। चित्र:शटरकॉक

इस तरह करें योगासन –

  • वज्रासन मुद्रा में बैठ जाएं अपनी रीढ़ को सीधा रखें ।
  • सांस लेते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर ले जाएं।
  • सांस छोड़ते हुए अपनी कमर के ऊपरी भाग के तरफ, आगे झुकें साथ ही दोनों हाथों को भी सीधा रखें, और माथे को जमीन पर।
  • 30 सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक मुद्रा में रहें ।
  • फिर वापिस वज्रासन मुद्रा मे आएं ।

वीरभद्रासन 2

वीरभद्रासन 2 इस आसन को वॉरियर पोज 2 नाम से भी जाना जाता है, एसिडिटी से छुटकारा दिलाने में यह काफी असरदार आसन है। पेट से जुड़ी अधिकतर समस्याएं इस आसन से दूर होती है। इस आसन को करने से पाचन तंत्र मजबूत और दुरुस्त रहता है।

इस तरह करें योगासन –

  • दोनों पैरों को सुविधा अनुसार 3 से 4 फुट के फासले पर फैलाकर खड़े हो जाएं।
  • दाहिने पैर को 90 डिग्री दाहिनी ओर घुमाया व बाएं पैर को 15 डिग्री दाहिने और घुमाएं। इस बात का ध्यान रखें कि दाहिने बाएं पैर की सीध में रहें।
  • दोनों हाथों को कंधे के समानांतर ऊपर उठाएं और दाएं-बाएं कंधे की सीध पर ले आए और हथेलियों को नीचे की ओर करें।
  • दोनों हाथ जमीन के समानांतर हो। सांस छोड़ते हुए दाहिने घुटने को मोड़ें, ताकि दाहिने जांघ घुटनों के पीछे जमीन के समानांतर हो जाए।
  • ध्यान रखें, कि दाहिने घुटना एवं दाहिनी टखना एक सीध में होना चाहिए व जांघ से पैर 90 डिग्री का कोण बनाना चाहिए।
  • घुटनों टखने से आगे ना जाए, सिर को दाहिने ओर घुमाएं और अपनी दाहिनी ओर हथेली को देखें। बाएं पैर को पूरी तरह तान कर रखे। घुटने मुड़ने ना दे। हाथों को भी तान कर रखें।
  • आसन में स्थिर होकर धीरे से पेल्विक को नीचे करें और एक योद्धा की तरह इस आसन में स्थिर हो जाए। मुस्कुराते रहें। नीचे की ओर जाते समय सांस समान रूप से लेते और छोड़ते रहे। अगर किसी तरह की समस्या हो, तो योगा विशेषज्ञ से संपर्क करें।
  • यह आसन की पूर्ण स्थिति है। इसमें 20 से 30 सेकंड तक रहें। बाद में अभ्यास के बाद समय बढ़ाया जा सकता है। सांस भरते हुए ऊपर उठे और विपरीत क्रया करते हुए वापस खड़े हो जाएं।
  • सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे दोनों हाथों को नीचे लाएं। हाथ पीछे बांधकर विश्राम करें। बाएं तरफ से भी अब इस क्रिया को दोहराएं व आसन में स्थित हो जाए। क्षमता अनुसार इसे 2 से 5 बार तक दोहराया जा सकता है।

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