आलस ही नहीं, आपका बनाया टिफिन भी दे रहा है आपके बच्चे को मोटापा, हम बता रहे हैं कैसे 

अगर आपको लगता है कि सारा दिन टीवी देखने या मोबाइल पर गेम खेलने के कारण ही आपका बच्चा मोटा होता जा रहा है, तो एक बार जरा यह भी चेक कीजिए कि आप उसे टिफिन में क्या दे रहीं हैं। 
जानें कैसे आपके बच्चो को हो सकते हैं मोटापे का शिकार
शालिनी पाण्डेय Updated on: 6 July 2022, 17:39 pm IST
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बच्चों में होने वाला मोटापा एक गंभीर स्थिति है। ज़्यादा वजन अक्सर बच्चों के लिए ऐसी बीमारियों की वजह बनता है, जिन्हें कभी वयस्क समस्याएं माना जाता था- जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और उच्च कोलेस्ट्रॉल। आपके बच्चे का मोटापा उसमें आत्मविश्वास की कमी और अवसाद का कारण बन सकता है। अकसर ऐसा माना जाता है कि ज्यादातर समय निष्क्रिय रहने वाले बच्चे ही मोटापे के शिकार होते हैं। जबकि वास्तविकता यह है कि आहार इसमें बहुत बड़ी भूमिका अदा करता है। यहां हम उन फूड्स (Foods causes obesity in child) के बारे में बताने जा रहे हैं, जो बच्चों में मोटापा बढ़ाने के लिए सबसे ज्यादा दोषी हैं। 

कब माना जाए कि बच्चा मोटापे का शिकार है 

अधिक वजन वाला हर बच्चा मोटा नहीं होता। कुछ बच्चों के शरीर के फ्रेम औसत से बड़े होते हैं और विकास के विभिन्न चरणों में शरीर में वसा की अलग-अलग मात्रा इकट्ठी करते हैं। 

बॉडी मास इंडेक्स (BMI), जो लम्बाई के संबंध में वजन का मापन करता है, अधिक वजन और मोटापे के बारे में जानने का सबसे अच्छा तरीका है। आपके बच्चे के डॉक्टर से उसके ग्रोथ चार्ट, बीएमआई और, यदि आवश्यक हो, तो अन्य परीक्षणों का उपयोग करके यह पता लगाने में मदद लें।

यदि आप चिंतित हैं कि आपका बच्चा बहुत अधिक वजन बढ़ गया है, तो उसके डॉक्टर से बात करें। डॉक्टर आपके बच्चे की ग्रोथ और ग्रोथ हिस्ट्री, आपके परिवार की बीएमआई हिस्ट्री आदि जांच करेंगे और आपको बताएंगे कि किस तरह इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है।

जानिए बच्चों में मोटापे के लिए जिम्मेदार 4 बड़े कारण 

1 व्यायाम की कमी

जो बच्चे ज्यादा सक्रिय नहीं रहते उनका वजन बढ़ने की संभावना अधिक होती है क्योंकि वे उतनी कैलोरी बर्न नहीं करते हैं जितना उनका इनटेक है। गतिहीन गतिविधियों में बहुत अधिक समय व्यतीत करना, जैसे कि टेलीविजन देखना या वीडियो गेम खेलना भी समस्या में योगदान देता है। टीवी शो में अक्सर अन्हेल्दी फूड आयटम्स के विज्ञापन होते हैं, जो बच्चों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं।

2 पारिवारिक कारक

यदि आपका, आपके पार्टनर का या परिवार के ज्यादातर लोगों का वजन अधिक है, तो भी बच्चे का वजन बढ़ने की संभावना अधिक हो सकती है। इसकी वजह परिवार की खानपान संबंधी आदतें हैं। जहां उच्च कैलोरी वाले खाद्य पदार्थ हमेशा उपलब्ध होते हैं और शारीरिक गतिविधि को प्रोत्साहित नहीं किया जाता है।

3 मनोवैज्ञानिक कारक

माता-पिता और पारिवारिक तनाव से बच्चे में मोटापे का खतरा बढ़ सकता है। कुछ बच्चे तनाव, निराशा और ऊब से निपटने के लिए बहुत ज्यादा खाने लगते हैं। जिसे स्ट्रेस ईटिंग कहते हैं। कई बार यही प्रवृत्ति माता-पिता में भी मौजूद होती है। 

4 आहार 

बहुत कम गतिविधि और बहुत अधिक कैलोरी वाली डाइट बच्चों में मोटापे के लिए ज़िम्मेदार है। फास्ट फूड, प्रोसेस्ड फ़ूड और स्नैक्स खाने से आपके बच्चे का वजन बढ़ सकता है। कैंडी और डेज़र्ट भी वजन बढ़ाने का कारण बन सकते हैं, फलों के रस और स्पोर्ट्स ड्रिंक सहित शर्करा पेय भी बढ़ते मोटापे की ओर इशारा करते हैं। इसलिए अपने बच्चों को फास्टफूड जैसे पास्ता, बर्गर आदि देने से बचना चाहिए। 

प्याज, शिमला मिर्च, टमाटर मिला होने के कारण घर के बने रोल पोषण से भरपूर। चित्र:शटरस्टॉक

टिफिन में दिए जाने वाले ये 5 फूड बना रहे हैं आपके बच्चे को मोटा 

फ्रूट फ्लेवर वाली चीजें 

फ्रूट यानी फल वाले फ्लेवर को पढ़कर यह न समझें कि कोई चीज फलों से बनी हुई है। उदाहरण के लिए, फ्रूट केक या फ्रूट गमी, कैंडी की तरह चीनी से भरे होते हैं। यह चीजें शुगर और केमिकल से भरी होती हैं, जो बच्चों के दांतों से चिपककर कैविटी की प्रॉब्लम देती है।

फ्रेंच फ्राइज

फ्रेंच फ्राइज बच्चों को बहुत पसंद होते हैं लेकिन ट्रांस फैट और कैलोरी से भरी हुई यह चीज बच्चों के डाइजेशन के लिए बहुत हानिकारक है। आप अगर फ्राइज को रिप्लेस ही करना चाहते हैं, तो आलू की जगह शकरकंद या दूसरी सब्जियों को ऑलिव ऑयल में फ्राई करके बच्चों को दें।

मीठी चीज़ें 

शुगर से भरपूर चीजों में फाइबर न के बराबर होता है। जैसे, क्रीम रोल फैट और शुगर के अलावा कोई भी पोषक तत्व नहीं होता है। बच्चों को ऐसी चीजें दें, जिसमें 10 ग्राम से कम चीनी और कम से कम तीन ग्राम फाइबर हो

फलों का रस

फलों का रस लगभग हमेशा बच्चों के लिए बेचा जाता है, और फिर से, यह स्वस्थ लगता है क्योंकि इसमें “फल” शब्द होता है। लेकिन फलों के नाश्ते की तरह ही, फलों का रस चीनी से भरा होता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स 1 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को फलों का रस नहीं लेने की सलाह देता है क्योंकि इसमें इस आयु वर्ग के लिए शून्य पोषण संबंधी लाभ होते हैं। 1-3 वर्ष की आयु के बच्चों को प्रतिदिन केवल 4 औंस, 4-6 के लिए केवल 4 से 6 औंस प्रतिदिन, और 7-18 वर्ष की आयु के लिए, केवल 8 औंस प्रतिदिन लेना चाहिए। वे बच्चों को सिप्पी कप में जूस नहीं देने की भी सलाह देते हैं जो उन्हें पूरे दिन पीने की अनुमति देते हैं क्योंकि इससे दांत खराब हो सकते हैं।

आपका सबसे अच्छा दांव जितना हो सके फलों के रस से परहेज करना और असली फल के साथ पानी, दूध या पानी के स्वाद की पेशकश करना है।

पॉपकॉर्न 

स्नैक के तौर पर अगर आप अपने बच्चे को  माइक्रोवेव पॉपकॉर्न दे रही हैं तो इसके हेल्दी होने की कोई गारंटी नहीं है। हालांकि पॉपकॉर्न को आमतौर पर एक बहुत अच्छा स्नैक माना जाता है क्योंकि इसमें बहुत अधिक फाइबर होता है और चीनी भी इसमें कम होती इसमें बहुत सारे एडिटिव्स, रसायन और कृत्रिम तत्व शामिल होते हैं। इस्तेमाल किए गए बैग खतरनाक रसायनों को छोड़ सकते हैं, जैसे कि परफ्लोरिनेटेड रसायन , जो गर्म होने पर ऐसे यौगिकों (composition) पैदा कर सकते हैं जो संभावित रूप से बच्चे के विकास के लिए हानिकारक हो सकते हैं और कैंसर से जुड़े हो सकते हैं।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स का कहना है कि पॉपकॉर्न एक धीमा खतरा है और इसे 4 साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं देना चाहिए।

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शालिनी पाण्डेय

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