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एजिंग की प्रक्रिया को धीमा करना है तो अपनी डाइट में जरूर शामिल करें विटामिन ई, जानें इसके स्रोत

Updated on: 10 December 2020, 10:54am IST
विटामिन ई सिर्फ आपकी त्वचा के लिये ही नहीं, पूरे शरीर के लिए आवश्यक है। जानिए विटामिन ई का महत्व और इसके स्रोत।
विदुषी शुक्‍ला
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विटामिन ई को बच्‍चों के आहार में जरूर शामिल करें। चित्र: शटरस्‍टॉक

जिस तरह आपकी गाड़ी में धीरे-धीरे जंग लगने लगती है, पुराने होने के साथ ही गाड़ी की परफॉर्मेंस में गिरावट आने लगती है, उसी तरह आप का शरीर भी पुराने होने के साथ कमजोर होता जाता है।

हमारे सेल्स यानी वह कोशिकाएं जिनसे शरीर बना है, धीरे-धीरे पुराने होकर मर जाते हैं। लेकिन हमारा शरीर खराब सेल्स की मरम्मत करता है और नए सेल्स बनाने की क्षमता रखता है। हमारे शरीर की यही खासियत है कि डैमेज रिपेयर करने की प्रक्रिया प्राकृतिक है। इस मरम्मत के लिए हमें पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है जो हमें हमारे भोजन से मिलते हैं। अगर भोजन में पोषण की कमी हो तो शरीर की मरम्मत नहीं हो पाती और यह डैमेज बढ़ता रहता है।

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दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज कल जिस तरह की हवा में हम सांस ले रहे हैं, जिस तरह का भोजन ले रहे हैं, उससे हमारे शरीर को पहुंचने वाला डैमेज कई गुना बढ़ गया है और हमारे शरीर को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता है।

विटामिन ई ऑयल एक पोषक तत्व के साथ साथ एंटीऑक्सीडेंट भी है। चित्र: शटरस्‍टॉक

सेल की मरम्मत का काम विटामिन ई करता है

हमारे शरीर का जो भी हीलिंग और रिपेयर का काम होता है, विटामिन ई ही करता है। विटामिन ई फैट-सॉल्यूबल होता है, यानी यह शरीर के फैट सेल्स में एकत्र हो सकता है। विटामिन ई एक एंटीऑक्सीडेंट भी है जो सेल्स को डैमेज से बचाने का काम करता है। यही कारण है कि त्वचा और बालों के लिये विटामिन ई बहुत फायदेमंद होता है।

फ्री रेडिकल्स से सेल्स को बचाता है विटामिन ई

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार विटामिन ई एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है जो एजिंग को धीमा करता है। यही कारण है कि सेल्स की मरम्मत के लिए विटामिन ई जरूरी है।
विटामिन ई एजिंग से होने वाली कई बीमारियों का जोखिम कम करता है- जैसे ब्लड वेसल्स का कठोर होना, ब्लड प्रेशर बढ़ना और हृदय सम्बंधी रोग।
मायो क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार विटामिन ई सिगरेट के धुएं और UV किरणों से होने वाले नुकसान को भी कम करता है।

ये हैं विटामिन ई के प्रमुख स्रोत-

टमाटर- एक मध्यम आकार के टमाटर में 0.7 मिलीग्राम विटामिन ई होता है। RDA के अनुसार 14 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति को हर दिन 15 मिलीग्राम विटामिन ई लेना चाहिए।

टमाटर विटामिन ई का महत्वपूर्ण स्रोत है। चित्र- शटरस्टॉक।

बीज – सनफ्लॉवर के बीज और चिया सीड्स में भरपूर मात्रा में विटामिन ई होता है।

नट्स और ड्राई फ्रूट्स- बादाम, हेजलनट और मूंगफली भी विटामिन ई का अच्छा स्रोत हैं। लगभग 30 ग्राम बादाम में 6.8 मिलीग्राम विटामिन ई होता है। वहीं उतनी ही मूंगफली में 4.3 मिलीग्राम विटामिन ई होता है। यही कारण है कि बादाम का तेल त्वचा और बालों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है।

पालक- आयरन के साथ-साथ पालक विटामिन ई का भी एक अच्छा स्रोत है। आधे कप उबले पालक में लगभग 1.9 मिलीग्राम विटामिन ई होता है।

ब्रोकोली विटामिन ई रिच फूड है। चित्र: शटरस्‍टॉक

ब्रोकोली– इस ग्रीन वेजिटेबल में बहुत से पोषक तत्व मौजूद हैं। विटामिन ई में भी ब्रोकोली भरपूर है। आधे कप ब्रोकोली में 1.2 मिलीग्राम विटामिन ई मौजूद होता है।

विटामिन ई के टैबलेट और कैप्सूल भी बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं। ध्यान रखें कि आप इन सभी फूड्स को अपनी डाइट में थोड़ा थोड़ा शामिल करें ताकि विटामिन ई की कमी ना हो।

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विदुषी शुक्‍ला विदुषी शुक्‍ला

पहला प्‍यार प्रकृति और दूसरा मिठास। संबंधों में मिठास हो तो वे और सुंदर होते हैं। डायबिटीज और तनाव दोनों पास नहीं आते।