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आपकी त्वचा में सुधार कर सकता है आयुर्वेद का जादुई ‘कुमकुमादि तेलम’, हम बता रहे हैं कैसे

Updated on: 8 March 2021, 09:59am IST
कुमकुमादि तेलम एक आयुर्वेदिक तेल है जो त्वचा को फिर से जीवंत करता है, काले घेरों को कम करता है, और एक प्राकृतिक चमक प्रदान करता है।
टीम हेल्‍थ शॉट्स
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कुमकुमादि तेलम आपको साफ और दमकता चेहरा पाने में मदद कर सकता है। चित्र-शटरस्टॉक।

बहुत बार ऐसा होता है कि हम पारंपरिक स्किनकेयर की तलाश में, कुमकुमादि तेलम को नजरअंदाज करते हैं, लेकिन ज्यादातर लोग यह नहीं जानते हैं कि यह घटक क्या है और यह त्वचा को कैसे प्रभावित कर सकता है।

तो, वास्तव में कुमकुमादि तेलम क्या है?

कुमकुमादि तेलम जड़ी बूटियों, पौधों, फूलों, फलों और दूध के अर्क का एक आयुर्वेदिक संयोजन है, जो आपकी त्वचा को लाभ प्रदान करता है। यह तेल अद्भुत काम करता है, क्योंकि यह त्वचा से संबंधित समस्याओं को मिटाने और त्वचा की प्राकृतिक चमक को बहाल करने में मदद करता है।

कुमकुमादि नाम इसके प्रमुख घटक से बना है- केसर, जिसे संस्कृत में कुमकुमा के नाम से जाना जाता है। केसर त्वचा की कोशिकाओं को फिर से जीवंत करता है और रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देता है, जो कि रंगत में निखार लाता है। 

यह तेल कॉस्मेटिक के साथ-साथ त्वचा के लिए चिकित्सीय प्रभाव प्रदान करता है, वह भी बिना किसी नुकसान के। त्वचा को पोषण देने के अलावा, यह क्लींजर, टोनर और मॉइस्चराइज़र के रूप में भी काम करता है।

आपकी त्वचा को पोषण देने के लिए यहां विभिन्न सामग्रियां हैं जो इस तेल में मौजूद हैं:

  1. केसर:

यह एक प्राकृतिक त्वचा टोनर के रूप में काम करता है, त्वचा की बनावट में सुधार करता है, काले घेरों को कम करता है और हाइपरपिग्मेंटेशन और उम्र बढ़ने के संकेतों को ठीक करता है।

झाइयों से छुटकारा पाना इतना भी मुश्किल नहीं है। चित्र: शटरस्‍टॉक
पिग्मेंटेशन से छुटकारा पाने में मदद करता है। चित्र: शटरस्‍टॉक
  1. मंजिष्ठा :

यह एक रक्त शोधक है, जिसे रक्त परिसंचरण में सुधार करने के लिए जाना जाता है। परिसंचरण में सुधार के कारण, यह त्वचा की रंगत में सुधार करता है, रंजकता को कम करता है, तेजी से घाव भरने को उत्तेजित करता है और सूजन को कम करता है।

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  1. लैक (लक्षा):

तेल लैक (लक्षा) से एंटीफंगल गुण प्राप्त करता है, जो कि लाख कीड़ों के स्रावित स्राव से प्राप्त होता है और त्वचा के संक्रमण के इलाज में उपयोगी है।

  1. चंदना:

यह चंदन के रूप में जाना जाता है, इस घटक का उपयोग पिंपल्स, मुंहासे के निशान, धब्बा, सन टैन, सुस्ती को कम करने और त्वचा से अतिरिक्त तेल को हटाने के लिए किया जाता है।

  1. दारुहरिद्रा (पेड़ की हल्दी)

इसमें शक्तिशाली एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण हैं, जो त्वचा के संक्रमण को दूर करने और विभिन्न अंतर्निहित त्वचा स्थितियों का इलाज करने में मदद करते हैं।

  1. मधुयष्टि:

कंकोशन में एक प्राकृतिक त्वचा को हल्का करने वाला आयुर्वेदिक घटक होता है, जिसे लीकोरिस रूट एक्सट्रैक्ट (मधुयष्टि) कहा जाता है, जो कि सूरज के संपर्क में आने से रंजकता पैदा करने वाले एंजाइम को रोकता है।

  1. नीलोत्पला:

यह वॉटर लिली के रूप में भी जाना जाता है। यह आपकी त्वचा की रंगत को चमकदार बनाता है, जलन को कम करने, त्वचा को मॉइस्चराइज करने और त्वचा को फिर से जीवंत करने के लिए महत्वपूर्ण है।

त्वचा को मॉइश्चराइज करने में मदद करता है। चित्र-शटरस्टॉक।
  1. निरोधना:

यह मूल रूप से बरगद के पेड़ का पत्ता है और इसका उपयोग मोल्स, घावों के उपचार और विभिन्न त्वचा संक्रमणों को रोकने के लिए किया जाता है।

  1. कमला केसरा:

कुमकुमादि तेलम की कमल की तने की सामग्री एक प्राकृतिक स्किन कंडीशनर के रूप में काम करती है जो त्वचा को मॉइस्चराइज़ करने में फायदेमंद होती है, जिससे मुंहासों के ब्रेकआउट्स और शुष्क त्वचा को रोका जा सकता है।

अब, इस तेल का उपयोग करने के लिए कोई मानक दृष्टिकोण नहीं है, लेकिन इसका उपयोग आपकी रात की स्किनकेयर रुटीन के हिस्से के रूप में किया जा सकता है। अपने चेहरे को साफ करके और उंगलियों के साथ चेहरे पर कुमकुमा़दि तेलम लगाकर शुरुआत करें। इसे पूरी तरह से त्वचा में अवशोषित होने तक, त्वचा पर धीरे-धीरे मसाज करें। इस अद्भुत तेल को सर्वोत्तम परिणामों के लिए रात भर काम करने दें और अगली सुबह इसे धो लें!

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ये हेल्‍थ शॉट्स के विविध लेखकों का समूह हैं, जो आपकी सेहत, सौंदर्य और तंदुरुस्ती के लिए हर बार कुछ खास लेकर आते हैं।